Dharm & Motivation

ज्योतिष में गुरु को माना जाता है सबसे शुभ ग्रह, जानें कुंडली के सभी 12 भावों में इसका फल

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 19, 2026
2 min read 1.2k views

गुरु को ज्योतिष में शुभ ग्रह माना जाता है। कुंडली में गुरु की स्थिति का आपके जीवन पर गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। गुरु कुंडली में शुभ हो तो व्यक्ति को सुख, वैभव और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। वहीं गुरु कुंडली में शुभ न हो तो व्यक्ति को जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि कुंडली के सभी 12 भावों में गुरु कैसे परिणाम देते हैं।

प्रथम भाव

कुंडली के पहले भाव में गुरु का होना बेहद शुभ होता है। यहां बैठा गुरु ग्रह व्यक्ति को ज्ञानी और आकर्षक बनाता है। ऐसे लोग धार्मिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। व्यक्ति समाज में सम्मानित होता है। ज्योतिष के अनुसार ऐसा व्यक्ति दीर्घायु होता है।

द्वितीय भाव

इस भाव में बैठा गुरु व्यक्ति को धन वान बनाता है। साथ ही ऐसे लोगों की वाणी भी बहुत शालीन होती है। पैतृक संपत्ति ऐसे लोगों को मिल सकती है।

तृतीय भाव

इस भाव में बैठा गुरु व्यक्ति को पराक्रमी बनाता है। ऐसे लोगों को सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

चतुर्थ भाव

गुरु का चतुर्थ भाव में होना व्यक्ति के लिए शुभ होता है। यहां बैठा गुरु आपको भूमि, भवन, वाहन का सुख प्रदान करता है साथ ही माता के साथ भी संबंध मधुर रहते हैं.

पंचम भाव

गुरु पंचम भाव में व्यक्ति को ज्ञानवान बनाता है। ऐसे लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में बेहद शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

छठा भाव

यहां बैठा गुरु व्यक्ति को स्वास्थ्य समस्याएं दे सकता है और साथ ही धन से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। हालांकि व्यक्ति शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला होता है।

सप्तम भाव

सप्तम भाव में गुरु हो तो व्यक्ति को अच्छा जीवनसाथी मिलता है। ऐसे लोगों को सामाजिक स्तर पर ख्याति प्राप्त होती है।

अष्टम भाव

अष्टम भाव रहस्य का भाव होता है। इस भाव में बैठा गुरु व्यक्ति को गूढ़ विषयों को जानने की ओर प्रेरित करता है। हालांकि, आकस्मिक हानि ऐसे लोगों को हो सकती है।

नवम भाव

इस भाव में बैठा गुरु व्यक्ति को भाग्यशाली बनाता है। ऐसे लोग धार्मिक प्रकृति वाले होते हैं और साथ ही करियर में भी अच्छे परिणाम ऐसे लोगों को मिलते हैं।

दशम भाव

दसवें भाव को कर्म का कारक भाव माना जाता है। इस भाव में बैठा गुरु व्यक्ति को उच्च पद दिला सकता है। साथ ही पारिवारिक जीवन में भी सुख की प्राप्ति हो सकती है।

एकादश भाव

गुरु का एकादश भाव में होना व्यक्ति को धनवान बनाता है। उन्नति और समाज में प्रतिष्ठा ऐसे लोगों को प्राप्त होती है। ऐसे लोगों के पास आय के कई स्रोत हो सकते हैं।

द्वादश भाव

यहां बैठा गुरु व्यक्ति को आध्यात्मिक और दानी बनाता है। ऐसे लोगों को जीवन में खूब यात्राएं करने का मौका मिल सकता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें:

सावन में लगने वाले हैं दो बड़े ग्रहण, जानें कहां-कहां आएगा नजर और पूजा पर क्या पड़ेगा असर?

Source link


Discover more from News Link360

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Ajay Kumar Verma

Ajay Kumar Verma

Bringing you the latest news and in-depth analysis from around the world.

Leave a Reply

Discover more from News Link360

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading