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अंक 13 को क्यों माना जाता है अशुभ? कई हॉस्पिटल में भी इस नंबर का नहीं होता कोई रूम, जानें मान्यताएं

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 20, 2026
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अंक 13 को लेकर देश दुनिया में कई तरह की मान्यताएं हैं। सभी संख्याओं में एक मात्र अंक 13 है जिसके साथ दुनिया ने सबसे ज्यादा भेदभाव किया है। अंक 13 से जुड़ा डर सदियों से चला आ रहा है और आज भी लोग इस अंक से डरते हैं। इस डर का जीता जागता उदाहरण यह है कि आज भी आपको कई हॉस्पिटल्स में 13 नंबर का कमरा नहीं मिलेगा, कई इमारतों की लिफ्ट में भी 13 फ्लोर की जगह 12A लिख दिया जाता है या फिर 12 वें फ्लोर से लिफ्ट सीधे 14वें फ्लोर पर जाती है। यहां तक की कई बड़ी विमानन कंपनियां अपने एयर क्राफ्ट में 13 नंबर की सीट ही नहीं रखती। अंक 13 के साथ भेदभाव का कारण क्या है आज हम कुछ मान्यताओं के जरिए समझने की कोशिश करेंगे।

भारत में अंक 13 से जुड़ी मान्यताएं

  • 13 को जोड़कर (1+3) 4 बनता है और अंक ज्योतिष में नंबर 4 राहु का है जोकि एक अशुभ ग्रह है। राहु ग्रह को भ्रम, भय, अचानक होने वाली दुर्घटनाओं का कारण माना जाता है। इसलिए अंक 13 से लोग दूरी बनाते हैं।
  • अंक ज्योतिष के अनुसार भले ही अंक 13 पर अशुभ ग्रह राहु का प्रभाव है और कई लोग अंक 13 से घबराते हैं लेकिन भारत में पश्चिमी सभ्यता से इतर कुछ सकारात्मकता भी देखने को मिलती है। जैसे- हर माह की त्रयोदशी तिथि (13 तारीख) को प्रदोष व्रत रखा जाता है जिसमें भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ होता है। इसके अलावा हिंदुओं का पवित्र त्योहार धनतेरस भी त्रयोदशी तिथि को ही पड़ता है।

यानि भारत में अंक 13 को लेकर मिश्रित मान्यताएं हैं और ज्यादातर लोग पश्चिमी प्रभाव के कारण ही अंक 13 को अशुभ मानते हैं। आइए अब जानते हैं पश्चिमी देशों में क्यों अंक 13 को इतना अशुभ माना जाता है।

पश्चिमी देशों में अंक 13 से जुड़ी मान्यताएं

  • ईसाई धर्म की मान्यताओं के अनुसार, ईसा मसीह के अंतिम भोजन (द लास्ट सपर) में उनके साथ 13 लोग बैठे हुए थे। टेबल पर आखिरी व्यक्ति यानि 13 वां शख्स जो बैठा उसका नाम यहूदा था और इसी ने ईसा मसीह को धोखा दिया था। जिस दिन लास्ट सपर किया जा रहा था वो गुरुवार का दिन था। वहीं यहूदा के धोखा देने के बाद शुक्रवार 13 (Friday the 13th) को ईसा मसीह को सूली पर लटका दिया गया।  इसलिए पश्चिमी देशों में अंक 13 को धोखे और अशुभता का प्रतीक माना जाता है। आज भी जब साल के किसी भी महीने में 13 तारीख को शुक्रवार आता है तो उस दिन को भी  Friday the 13th की तरह अशुभ माना जाता है, इस दिन पश्चिमी देशों के लोग कोई भी शुभ कार्य नहीं करते और ईसा मसीह की मृत्यु का शोक मनाते हैं।
  • पश्चिमी देशों में अंक 13 से जुड़ी लोकी की एक कहानी भी प्रचलित है। इस कहानी के अनुसार वलहाला (दिव्य लोक) में 12 देवता दावत कर रहे थे और तभी वहां एक बिन बुलाया 13वां मेहमान आ गया। यह मेहमान कोई और नहीं छल-कपट का देवता लोकी था। लोकी के आने से दावत में वाद-विवाद होने लगा और विवाद के बढ़ने के बाद देवताओं के प्रिय बाल्डर (मासूमियत, शांति और न्याय के देवता) की हत्या हो गई। तब से ही 13वें व्यक्ति की उपस्थिति को अशुभ माना जाने लगा और अंक 13 को भी अशुब अंक की श्रेणी में रख दिया गया। नॉर्डिक मान्यताओं में ये कहानी बहुत प्रचलित है।
  • यही वजह है कि पश्चिमी देशों में आपको 13 नंबर का कमरा ज्यादातर हॉस्पिटल या होटलों में नहीं मिलता हालांकि पश्चिमी प्रभाव के कारण अब भारत समेत दुनिया के कई देशों में इस अंक से भेदभाव किया जाने लगा है।

क्या सच में अशुभ है अंक 13?

अंक 13 से जुड़ी मान्यताएं भले कुछ भी हों लेकिन इसे अशुभ ठहराने का कोई वैज्ञानिक कारण नजर नहीं आता। इस अंक से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक इतिहास के कारण ही इसे अशुभ माना जाता है। विज्ञान में अंक 13 से जुड़े डर को ट्रिस्काईडेकाफोबिया (Triskaidekaphobia) कहा जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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