हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। ऐसे ही बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए अति उत्तम और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी संकट, बाधाएं और दुख दूर हो जाती हैं। साथ ही कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है। इसके साथ ही बुधवार के दिन गणेश चालीसा का पाठ करना भी शुभ और फलदायी होता है।
गणेश चालीसा पाठ के नियम
- बुधवार के दिन स्नान आदि के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- फिर मंदिर को साफ करें और फिर गणेश जी की पूजा करें।
- श्री गणेश जी को दूर्वा, मोदक या बेसन के लड्डू अर्पित करें और सिंदूर का तिलक लगाएं।
- गणेश जी के सामने गाय के शुद्ध घी या तेल का दीपक जलाएं।
- इसके बाद गणेश चालीसा का पाठ करें।
- चालीसा पढ़ने के बाद गणेश जी की आरती और मंत्र का जाप करें।
- बुधवार के दिन हरे या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
- बुधवार के दिन भगवान गणेश को ये फूल भी जरूर अर्पित करें।।
श्री गणेश चालीसा
॥ दोहा
जय गणपति सदगुण सदन,कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण,जय जय गिरिजालाल॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति गणराजू।मंगल भरण करण शुभ काजू।
जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता।
वक्र तुण्ड शुचि शुन्द सुहावना।तिलका त्रिपुण्ड भल मन भवन।
राजत मणि मुक्तन उर माला।स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
हाथ में पुस्तक फरसा त्रिशूल. मोदक भोग सुगंधित पुष्प.
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन छः मुख भ्राता।गौरी पालने विश्वविख्यात।
ऋद्धि-सिद्धि आपके चंवर को सुधारती है।
मुझे अपने जन्म की मंगलमय कथा सुनाइये। अत्यंत पवित्र, पवित्र एवं मंगलमय।
एक समय गिरिराज कुमारी।पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी।बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
मुझे वरदान देने के कारण मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं।
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना।पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै।पालना पर बालक स्वरूप हवै॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
शुभ आयोजन का अत्यंत आनंद देखकर। शनि भी इसे देखने आये।
शनि के मन में उनके अपने दोष और गुण। बच्चा, देखना नहीं चाहता.
गिरिजा कछु मन भेद बढायो।उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥
शनि ने कहा, मेरा मन ठिठक गया। तुम क्या करोगे, मुझे बच्चा दिखाओगे.
विश्वास नहीं उमा उर भयौ। शनि पुत्र बालक कहयौ देखत।
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा।शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।काटी चक्र सो गज सिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो।प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब किया। प्रथम पूजित बुद्धि खजाना, दिया वरदान।
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई।रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
उसने अपनी माता और पिता के पैर पकड़ लिए और उनकी सात बार परिक्रमा की।
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी।करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग, काकरा, दुर्वासा।
अब प्रभु दया दीना पर कीजै।अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
॥ दोहा
श्री गणेश यह चालीसा,पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै,लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्र दश,ऋषि पंचमी दिनेश।
पुराण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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