Dharm & Motivation

बच्चे के जन्म के बाद क्यों माना जाता है सूतक? जानिए शास्त्रों में पूजा-पाठ और मंदिर जाने के नियम

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 21, 2026
1 min read 1.2k views

सनातन परंपरा में बच्चे के जन्म के बाद कुछ समय तक सूतक मानने की परंपरा है। इस दौरान पूजा-पाठ और मंदिर जाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। धर्मशास्त्रों में इसके धार्मिक कारण बताए गए हैं। बच्चे के जन्म के बाद सूतक मानने की परंपरा क्यों है? इस दौरान पूजा-पाठ और मंदिर प्रवेश को लेकर शास्त्रों में क्या नियम बताए गए हैं, सूतक कब समाप्त होता है और पूजा दोबारा कब शुरू की जाती है, बच्चे का जन्म मूल नक्षत्र में होने पर क्या अलग नियम लागू होते हैं? आइए जानते हैं सूतक से जुड़े प्रमुख नियम और मान्यताएं क्या हैं।।

जन्म के साथ शुरू होता है सूतक

मान्यताओं के अनुसार, शिशु के जन्म लेते ही घर में सूतक आरंभ हो जाता है। गरुड़ पुराण, मनुस्मृति और पराशर स्मृति जैसे धर्मग्रंथों में जन्म और मृत्यु, दोनों अवसरों पर सूतक का उल्लेख मिलता है। यह एक निश्चित अवधि तक चलने वाला ऐसा समय है, जब पूजा-पाठ और कुछ धार्मिक कार्यों से दूरी रखी जाती है।

पूजा-पाठ से क्यों रखा जाता है विराम?

शास्त्रों के अनुसार, जन्म के बाद कुछ समय तक घर को शुद्धिकरण की प्रक्रिया में माना जाता है। इसी वजह से परिवार के सदस्यों को मंदिर जाने और विधिवत पूजा करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इस दौरान मन ही मन भगवान का स्मरण या मंत्र जाप किया जा सकता है।

सूतक कब होता है समाप्त?

अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में सूतक की अवधि अलग हो सकती है। कई परिवारों में 12वें दिन शुद्धिकरण संस्कार के बाद दोबारा पूजा-पाठ शुरू कर दिया जाता है। इसी अवसर पर नवजात को पहली बार सूर्य दर्शन भी कराए जाते हैं। वहीं कुछ स्थानों पर यह अवधि लगभग 40 दिनों की होती है, जिसे जच्चा-बच्चा की देखभाल और संक्रमण से बचाव से जोड़कर देखा जाता है।

मूल नक्षत्र में जन्म पर क्या नियम हैं?

बच्चे का जन्म मूल नक्षत्र में होता है, तो कई परंपराओं में मूल शांति पूजा के बाद ही सूतक समाप्त माना जाता है। यह पूजा 27वें दिन कराई जाती है। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा कर नियमित पूजा-पाठ की शुरुआत की जाती है।

मंदिर जाने को लेकर मान्यता

सूतक में मंदिर जाने की भी मनाही है। यह अवधि पूरी हो जाती है, तब परिवार मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अलावा इस परंपरा को प्रसूता मां को पर्याप्त आराम देने और नवजात की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से भी देखा जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: अलमारी में गंदे तरीके से रखे गए कपड़े राहु ग्रह को करते हैं अशांत, समय रहते बदलें ये आदत, वरना बढ़ सकती है नकारात्मकता

Source link


Discover more from News Link360

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Ajay Kumar Verma

Ajay Kumar Verma

Bringing you the latest news and in-depth analysis from around the world.

Leave a Reply

Discover more from News Link360

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading