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गुरु पूर्णिमा 2026 कब मनाई जाएगी? जानें शुभ तिथि, महत्व और इस दिन क्या करना चाहिए

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 21, 2026
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सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है। माना जाता है कि व्यक्ति को जीवन की हर मुश्किल घड़ी में गुरु की शरण में जाकर ही सही समाधान प्राप्त हो सकता है और व्यक्ति की हर उपलब्धि का पहला श्रेय भी गुरु को ही जाता है। सनातन परंपरा में एक दिन विशेष रूप से गुरु को समर्पित किया गया है। इसी लिए गुरु पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। तो चलिए जानते हैं साल 2026 में गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और इस दिन क्या करना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इसे साल की सबसे पुण्यदायी पूर्णिमाओं में से एक बताया है। साल 2026 में पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 29 जुलाई को रात 8 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए

गुरु का सम्मान करें: गुरु ही जीवन में सही और गलत का अंतर समझाते हैं और सफलता का मार्ग दिखाते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु, माता-पिता और सभी वरिष्ठजनों का सम्मान करें,  उनके प्रति आभार व्यक्त करें। एक सच्चा धन्यवाद और सम्मान का भाव रिश्तों को मजबूत बनाता है।

ज्ञान का सम्मान: गुरु पूर्णिमा ज्ञान के महत्व को समझने का भी दिन है। इस दन संकल्प लें कि अपने ज्ञान का उपयोग हमेशा अच्छे काम के लिए करेंगे। पढ़ाई को समझने और जीवन में अपनाने का प्रयास करें। ज्ञान का सम्मान करने वाला व्यक्ति ही आगे बढ़ता है।

नए लक्ष्य तय करें: यह दिन जीवन में नए संकल्प लेने के लिए भी शुभ माना जाता है। अपनी पढ़ाई, करियर या व्यक्तिगत विकास से जुड़े लक्ष्यों को स्पष्ट करें। उन्हें डायरी में लिखें और उन्हें पूरा करने की योजना बनाएं। सही दिशा में किया गया छोटा प्रयास भी भविष्य में बड़ी सफलता का आधार बनता है।

इन चीजों का करें दान: जरूरतमंद बच्चों को किताबें, कॉपी, पेन या अन्य शैक्षणिक सामग्री दान करें। ऐसे कई बच्चे हैं जो संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई नहीं कर पाते। शिक्षा से जुड़ी वस्तुओं का दान उनके भविष्य को बेहतर बनाने में मददगार होता है।

सेवा और विनम्रता अपनाएं: गुरु पूर्णिमा का संदेश केवल गुरु वंदना तक सीमित नहीं है। यह पर्व सेवा, विनम्रता और अच्छे व्यवहार का महत्व भी सिखाता है। दूसरों की मदद करने और सभी के प्रति सम्मान का भाव रखने से व्यक्तित्व निखरता है। यही गुण जीवन में सफलता और सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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