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देवशयनी एकादशी के दिन करें भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप, यहां जानिए पूजा का ब्रह्म और अभिजित मुहूर्त

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 22, 2026
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हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस एकादशी को हरिशयनी, योगनिद्रा या पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। देवशयनी एकादशी के दिन श्री हरि की आराधना करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। इसके साथ ही देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। तो यहां जानिए विष्णुजी के मंत्र और शुभ मुहूर्त के बारे में।

देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर होगा। देवशयनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 45 मिनट से सुबह 5 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

देवशयनी एकादशी 2026 पारण का समय

देवशयनी एकादशी का पारण 26 जुलाई 2026 को किया जाएगा। एकादशी पारण के लिए शुभ समय सुबह 6 बजकर 13 मिनट से सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय  दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर होगा। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात् ही होता है। द्वादशी तिथि के अंदर पारण न करना पाप करने के समान होता है। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।

विष्णु जी के मंत्र

  1. ॐ नमः नारायणाय।
  2. ओमे नमो भगवते वासुदेवाय।
  3. ॐ श्री विष्णुवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। विष्णु हमारी उन्नति करें।
  4. शांतिपूर्ण रूप, सर्प-शैय्या, कमल-नाभि वाले देवताओं के भगवान, ब्रह्मांड का आधार, आकाश की तरह, बादलों का रंग, शुभ शरीर। मैं विष्णु की पूजा करता हूं, लक्ष्मी के प्रेमी, कमल-नेत्र, योगियों द्वारा ध्यान के लिए सुलभ, जन्म और मृत्यु के भय को दूर करने वाले, सभी संसारों के एकमात्र स्वामी।
  5. भगवान विष्णु का कल्याण हो और गरुड़ की ध्वजा का कल्याण हो। कमल-नेत्र भगवान शुभ हैं, और हरि का शरीर शुभ है।

चातुर्मास 2026

देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान श्री विष्णु विश्राम के लिए क्षीर सागर में चले जाते हैं और पूरे चार महीनों तक वहीं पर रहेंगे। भगवान श्री हरि के शयनकाल के इन चार महीनों को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। इन चार महीनों में श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास शामिल हैं। चातुर्मास के आरंभ होने के साथ ही अगले चार महीनों तक शादी-ब्याह आदि सभी शुभ कार्य करना वर्जित हो जाता है। चातुर्मास का समापन देवउठनी एकादशी के दिन होगा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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