आत्मविश्वास व्यक्ति की सफलता और मजबूत व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका संबंध सूर्यदेव से जोड़ा जाता है। अगर आपके अंदर भी आत्मविश्वास की कमी है तो इसे दूर करने का एक बहुत ही आसान धार्मिक उपाय बताया गया है। कहा जाता है कि अगर रविवार के दिन श्रद्धा के साथ सूर्यदेव की पूजा और सूर्य चालीसा का पाठ किया जाए, तो आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समाज में मान-सम्मान बढ़ाने में मदद मिलती है। यहां पढ़िए संपूर्ण सूर्य चालीसा और इसके लाभ।
श्री सूर्य चालीसा (श्री सूर्य चालीसा)
दोहा: कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्तस्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
विवस्वान्, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, पक्षी, सूर्य को कहते हैं, वेद गाते हैं हिरण्यगर्भ।
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
‘ॐ हिरण्यगर्भाय नमः’ कहते हुए नाम लें आदित्य
वे प्रेम के बारह नाम गाते हैं, और बारह बार सिर झुकाते हैं।
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
गर्दन सुनहरी रेत की सुंदरता है, तिग्मेटेजस के कंधे लालच हैं।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
धन्य हैं आप, हे दिनों के देवता, जो मनुष्यों की सेवा करते हैं।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
दोहा: भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्या। सुख सम्पत्ति विविध, वे सदा कृतज्ञ।
सूर्य चालीसा पाठ करने से मिलते हैं कई लाभ
- सूर्य चालीसा का नियमित पाठ करने से आत्मविश्वास और आत्मबल में वृद्धि होती है।
- निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर फैसले लेने में सक्षम बनता है।
- नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व में निखार आता है।
- समाज में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और प्रभाव बढ़ता है।
- पिता के साथ संबंधों में मधुरता और आपसी सम्मान बढ़ सकता है।
- करियर और नौकरी में नई जिम्मेदारियां और सफलता के अवसर मिलने की संभावना बढ़ती है।
- मानसिक एकाग्रता और अनुशासन बेहतर होने में मदद मिल सकती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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