सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान सच्ची श्रद्धा से की गई शिव आराधना न केवल मनोकामनाएं पूरी करती है, बल्कि कुंडली में मौजूद नवग्रह दोष निवारण में भी सहायक है। सावन के महीने में कुछ विशेष चीजों से शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ फलदायी होता है। तो चलिए जानते हैं इस पवित्र माह में किए गए कौन से उपाय ग्रहों के दुष्प्रभावों से राहत दिला सकते हैं।
सावन में करें शिव आराधना
इस साल सावन का आरंभ 30 जुलाई से हो रहा है। जिन लोगों की कुंडली में नवग्रह दोष होते हैं, उन्हें जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सावन में नियमित रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है।
- सूर्य दोष का उपाय: अगर सूर्य से जुड़ी परेशानियां, आत्मविश्वास में कमी या स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हों, तो आक (मदार) के पत्तों को पीसकर गंगाजल या शुद्ध जल में मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ होता है।
- चंद्र दोष का उपाय: मानसिक तनाव, बेचैनी या चंद्र दोष को शांत करने के लिए काले तिल को पीसकर जल में मिलाएं और उससे भगवान शिव का अभिषेक करें।
- मंगल दोष का उपाय: कुंडली में अशुभ मंगल के कारण विवाह, भूमि या अन्य कार्यों में रुकावट आ रही हो, तो गिलोय के रस को जल में मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करना लाभकारी माना जाता है।
- बुध दोष का उपाय: बुद्धि, वाणी, शिक्षा या करियर में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विधारा के रस से भगवान शिव का अभिषेक करने की मान्यता है।
- गुरु दोष का उपाय: गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए गाय के दूध में हल्दी मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसे शुभ फल और ज्ञान-वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- शुक्र दोष का उपाय: दांपत्य जीवन, सुख-सुविधाओं या संतान से जुड़ी समस्याओं के लिए गाय के दूध से बनी छाछ से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करना शुभ माना जाता है।
- शनि दोष का उपाय: अगर शनि के अशुभ प्रभाव परेशान कर रहे हों, तो शमी के पत्तों को पीसकर जल में मिलाएं और उसी जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- राहु दोष का उपाय: राहु के कारण बार-बार रुकावटें या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ रही हों, तो दूर्वा को जल में मिलाकर महादेव को अर्पित करना लाभकारी बताया है।
- केतु दोष का उपाय: केतु दोष को शांत करने के लिए कुश की जड़ को पीसकर गंगाजल में मिलाएं और उससे शिवलिंग का अभिषेक करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे केतु के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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