9 भारतीय भाषाओं को नई पहचान, UGC की पहल से पेरेंट्स को मिला सीखने का मौका; जानें कोर्स और नियम


UGC का मानना है कि भारतीय भाषाएं केवल बोलचाल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि उन्हें पढ़ाई शोध और रोजगार से भी जोड़ा जाना जरूरी है इसी सोच के साथ यह फैसला लिया गया है ताकि भाषा सीखने वालों की संख्या बढ़े और विश्वविद्यालय समाज से सीधे तौर पर जुड़ सकें कई बार देखा गया है कि पेरेंट्स अपने बच्चों की पढ़ाई में रुचि तो लेते हैं लेकिन खुद सीखने का मौका नहीं मिल पाता अब इस पहल से माता पिता भी बच्चों के साथ सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे जिससे घर में पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा.

इसके अलावा जो लोग रिटायर हो चुके हैं या नौकरी के साथ कुछ नया सीखना चाहते हैं उनके लिए भी यह एक अच्छा अवसर होगा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का अनुभव लेना और सर्टिफिकेट हासिल करना उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा साथ ही भारतीय भाषाओं में दक्षता बढ़ने से अनुवाद लेखन शिक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी नए अवसर पैदा होंगे.

UGC को उम्मीद है कि इस पहल से क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा और धीरे धीरे अंग्रेजी पर निर्भरता कम होगी जब अलग अलग उम्र के लोग एक साथ भाषा सीखेंगे तो सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत होगा और विश्वविद्यालय ज्ञान के केंद्र के साथ साथ सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी उभरकर सामने आयेंगे .

UGC की पहल क्या है
UGC का कहना है कि शिक्षा किसी एक उम्र या वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए इसी सोच के तहत अब विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भारतीय भाषा के कोर्स सभी के लिए खोलें इसका मतलब यह है कि जो लोग पढ़ाई छोड़ चुके हैं या फिर अपने ज्ञान को बढ़ाना चाहते हैं वे भी अब विश्वविद्यालयों से भाषा सीख सकते हैं.

कौन कौन कर सकेगा आवेदन
इस नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र शिक्षक यूनिवर्सिटी स्टाफ पेरेंट्स और अन्य इच्छुक लोग भारतीय भाषा कोर्स के लिए आवेदन कर सकेंगे यानी अगर किसी छात्र के माता पिता या परिवार का कोई सदस्य किसी भारतीय भाषा को सीखना चाहता है तो वह भी इन कोर्स का हिस्सा बन सकता है.

किन भाषाओं के कोर्स होंगे उपलब्ध
UGC के अनुसार इन कोर्स में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भारतीय भाषाओं को शामिल किया जाएगा इनमें हिंदी तमिल तेलुगु मलयालम कन्नड़ मराठी गुजराती पंजाबी बंगाली असमिया उड़िया उर्दू संस्कृत नेपाली कश्मीरी कोंकणी बोडो मैथिली डोगरी संथाली और सिंधी जैसी भाषाएं शामिल हैं इससे क्षेत्रीय भाषाओं को भी बढ़ावा मिलेगा.

कोर्स का लेवल और स्ट्रक्चर
भारतीय भाषा कोर्स को अलग अलग स्तर पर कराया जाएगा जैसे बेसिक लेवल इंटरमीडिएट लेवल और एडवांस लेवल ताकि हर व्यक्ति अपनी जरूरत और समझ के अनुसार भाषा सीख सके ये कोर्स क्रेडिट आधारित होंगे छात्रों के लिए इसका अकादमिक फायदा होगा और पेरेंट्स व अन्य लोगों को कोर्स पूरा करने पर प्रमाण पत्र दिया जाएगा.

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