वाई-फाई और ब्लूटूथ की खोज में हेडी लामार का योगदान जानिए.
80 साल पहले, जब लोग उन्हें सिर्फ स्क्रीन पर सुंदरता बिखेरते देखते थे, तब वे चुपके से एक ऐसी तकनीक पर काम कर रही थीं जो आज हमारे फोन, लैपटॉप और पूरी डिजिटल दुनिया को जोड़े रखती है. उनकी खोज-फ्रीक्वेंसी हॉपिंग- युद्ध के समय की जरूरत से पैदा हुई, लेकिन आज यह वाई-फाई, ब्लूटूथ और जीपीएस की रीढ़ है.
Wi-Fi, Bluetooth और GPS-सबकी जड़ में है एक अभिनेत्री
वे 1940 के दशक की हॉलीवुड स्टार थीं, जिन्होंने ‘समसन एंड डेलिला’ जैसी फिल्मों में चमक बिखेरी. लेकिन उनकी असली प्रतिभा कैमरे के पीछे छिपी थी- वे एक शानदार आविष्कारक थीं, जिनकी खोज आज हमारे वाई-फाई, ब्लूटूथ और जीपीएस जैसी तकनीकों की नींव है.
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हेडी को पता चला कि दुश्मन आसानी से रेडियो सिग्नल को जाम करके सहयोगी देशों के टॉरपीडो (पनडुब्बी से छोड़े जाने वाले हथियार) को बेकार कर देते थे. सिग्नल एक ही फ्रीक्वेंसी पर रहता था, इसलिए उसे रोकना आसान था. हेडी ने सोचा, अगर सिग्नल बार-बार फ्रीक्वेंसी बदलता रहे, तो उसे जाम करना बहुत मुश्किल हो जाएगा. इसे फ्रीक्वेंसी हॉपिंग कहते हैं, जो स्प्रेड स्पेक्ट्रम तकनीक का एक रूप है.
हेडी को संगीत पसंद था. उन्होंने अवांत-गार्डे संगीतकार जॉर्ज एंथील से यह आइडिया शेयर किया. एंथील प्लेयर पियानो (ऑटोमैटिक पियानो) के एक्सपर्ट थे, जिसमें छेद वाली टेप से नोट्स बदलते थे. दोनों ने मिलकर इस आइडिया को विकसित किया, सिग्नल भेजने और प्राप्त करने वाले दोनों डिवाइस एक ही पैटर्न से फ्रीक्वेंसी बदलें, जैसे पियानो रोल में नोट्स. इससे सिग्नल सुरक्षित और जाम-प्रूफ हो जाता.
1942 में उन्हें ‘सीक्रेट कम्युनिकेशन सिस्टम’ का पेटेंट मिला. हेडी ने इसे अमेरिकी नौसेना को मुफ्त में ऑफर किया, लेकिन उस समय इसे ठुकरा दिया गया. शायद क्योंकि वे एक अभिनेत्री थीं, लोग उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा को गंभीरता से नहीं लिया. पेटेंट खत्म हो गया और उन्हें कभी रॉयल्टी नहीं मिली.
1960 में बदल गई बात
लेकिन समय ने न्याय किया. 1960 के दशक में अमेरिकी सेना ने इसी तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया. आज फ्रीक्वेंसी हॉपिंग स्प्रेड स्पेक्ट्रम (FHSS) और स्प्रेड स्पेक्ट्रम के दूसरे रूप ब्लूटूथ में मुख्य रूप से इस्तेमाल होते हैं. वाई-फाई की शुरुआती स्टैंडर्ड्स (जैसे 802.11) में FHSS शामिल था, और पूरी स्प्रेड स्पेक्ट्रम तकनीक (जिसमें DSSS मुख्य है) इंटरफेरेंस से बचाने और सुरक्षित कम्युनिकेशन के लिए हेडी की खोज से प्रेरित है. हमारा वायरलेस इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, जीपीएस- सबमें इसकी छाप है. यह तकनीक सिग्नल को फैलाकर मजबूत और सुरक्षित बनाती है, ठीक वैसे ही जैसे हेडी ने सोचा था.
हॉल ऑफ फेम में मिल गई जगह
देर से ही सही, 1997 में उन्हें अवॉर्ड मिला और 2014 में नेशनल इन्वेंटर्स हॉल ऑफ फेम में जगह. हेडी की कहानी बताती है कि सुंदरता के पीछे कितनी गहराई हो सकती है. उन्होंने साबित किया कि एक अभिनेत्री भी दुनिया बदलने वाली तकनीक बना सकती है. आज जब आप वाई-फाई से कनेक्ट होते हैं, तो हेडी लामार को याद करें- उनकी दूरदर्शिता ने हमें वायरलेस दुनिया दी.
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