टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने अक्टूबर 2025 में दूरसंचार विभाग (DoT) के प्रस्ताव को मंजूरी दी. इस नई व्यवस्था को Calling Name Presentation यानी CNAP कहा जा रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि जब भी आपके फोन पर कॉल आएगी, स्क्रीन पर केवल नंबर नहीं, बल्कि कॉल करने वाले व्यक्ति का असली नाम दिखाई देगा. यह नाम वही होगा, जो सिम लेते समय टेलीकॉम कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज और सत्यापित किया गया है. यानी जानकारी सीधे ऑपरेटर के आधिकारिक कस्टमर डेटाबेस से आएगी, जिससे उसकी विश्वसनीयता बनी रहेगी.
साधारण फीचर फोन में होगी यही सुविधा
सरकार और TRAI का मकसद कॉलिंग सिस्टम में पारदर्शिता लाना और लोगों को सही फैसला लेने में मदद करना है. अभी तक मोबाइल पर केवल कॉलिंग लाइन आईडी (CLI) यानी नंबर दिखाई देता है, नाम दिखाने की कोई अनिवार्य व्यवस्था नहीं थी. अब CNAP के लागू होने से यह कमी दूर हो जाएगी और स्मार्टफोन ही नहीं, साधारण फीचर फोन पर भी यह सुविधा अपने आप काम करेगी. इसके लिए किसी अलग ऐप को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी.
स्पैम और ठगी वाले कॉल पर लगेगी लगाम
TRAI ने यह भी साफ किया है कि यह सुविधा देशभर के सभी उपभोक्ताओं के लिए डिफॉल्ट रूप से चालू रहेगी. अगर कोई ग्राहक इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहता, तो वह अपने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करके ऑप्ट-आउट कर सकता है. इससे निजता और सुविधा, दोनों का संतुलन बना रहेगा. TRAI ने अपने बयान में कहा है कि इससे स्पैम और ठगी वाले कॉल्स पर लगाम लगेगी. नियामक के शब्दों में, “कॉल पाने वाले व्यक्ति को यह तय करने में मदद मिलेगी कि कॉल उठानी है या नहीं.” इससे डिजिटल बातचीत में भरोसा भी बढ़ेगा.
तकनीकी स्तर पर हर टेलीकॉम कंपनी को अपना कॉलिंग नेम यानी CNAM डेटाबेस तैयार करना होगा, जिसमें हर नंबर के साथ उसके सत्यापित नाम की मैपिंग होगी. जब कोई कॉल आएगी, तो नेटवर्क उसी डेटाबेस से जानकारी मिलान करके रिसीवर के फोन पर नाम दिखा देगा. इससे जवाबदेही बढ़ेगी और गलत पहचान की गुंजाइश कम होगी.
ट्रायल में सामने आई तकनीकी चुनौतियां
CNAP को लागू करने से पहले DoT ने चुनिंदा शहरों में 4G और 5G नेटवर्क पर इसका ट्रायल भी किया था. परीक्षण के दौरान कुछ तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, जैसे जरूरी सॉफ्टवेयर पैच की कमी और नेटवर्क अपग्रेड की जरूरत. इन्हीं कारणों से यह प्रयोग केवल पैकेट-स्विच्ड नेटवर्क तक सीमित रहा, जहां मोबाइल डेटा और VoIP कॉल्स चलती हैं, जबकि पारंपरिक वॉइस कॉल वाले सर्किट-स्विच्ड नेटवर्क पर अभी और तैयारी की जरूरत है. जब यह व्यवस्था पूरी तरह तैयार हो जाएगी, तब CNAP को अलग सेवा के रूप में नहीं बेचा जाएगा, बल्कि मौजूदा टेलीकॉम सेवाओं के साथ जोड़ा जाएगा.
इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत में डिजिटल भरोसे को मजबूत करेगा. बढ़ते फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी के दौर में एक सिस्टम लोगों को ज्यादा सुरक्षित महसूस कराएगा, खासकर बुजुर्गों और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले यूजर्स को. फिलहाल इसके देशभर में लागू होने की तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन टेलीकॉम कंपनियां इसे मार्च 2026 तक शुरू कर सकती हैं.
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