मकर संक्रांति पर सूर्य-शनि का ऐसा संयोग, जो पिता-पुत्र के रिश्ते सुधार सकता है! जानें खास उपाय?


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Makar Sankranti remedy for father and son: जिन भी लोगों की अपने पिताजी के साथ बनती नहीं है या उनके साथ हमेशा अनबन रहती है, तो मकर संक्रांति के दिन कुछ खास उपाय करने से पिता-पुत्र के बीच संबंधों में मिठास बढ़ने के साथ गहराई भी बढ़ती है. दरअसल मकर संक्रांति के मौके पर भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. 

मकर राशि के स्वामी न्याय और कर्म प्रधान देवता शनि देव होते हैं और सूर्यदेव के पुत्र शनि देव हैं. यानी शनि देव और सूर्य भगवान के बीच पिता-पुत्र का संबंध है और आगे आने वाले एक महीने तक सूर्य देव मकर राशि यानी अपने पुत्र शनि देव के घर में रहते हैं. 

हर साल की तरह इस साल भी मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026, बुधवार के दिन मनाया जाएगा. 

मकर संक्रांति पर करें ये खास उपाय

जिन भी लोगों की अपने पिता के साथ हमेशा अनबन की स्थिति बनी रहती है, उन्हें मकर संक्रांति के दिन कुछ खास उपायों को करने से फायदा होगा. इन उपायों पर अमल करने से पिता-पुत्र के संबंधों में मिठास बढ़ने के साथ भगवान सूर्य और शनि देव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.

मकर संक्रांति के दिन संभव हो तो किसी तीर्थ स्थान के दर्शन करें. अगर आपके पिताजी साथ चल सकते हैं तो उनको भी अपने साथ तीर्थ दर्शन के लिए लेकर जाएगा. तीर्थ स्थान पर अगर गंगा नदी हो तो वहां जाए और पिताजी के साथ स्नान करें. पिता-पुत्र दोनों ही भगवान सूर्य को अर्घ्य दें. भास्कर प्रणाम करने के साथ ओम घृणि सूर्याय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें.

जरूरतमंदों को करें अन्न दान

स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और किसी भी शिव मंदिर में जाकर भोलेनाथ को जल चढ़ाएं और ऊं नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें.

इसके बाद 5 पैकेट चावल, दाल, आटा, घी, गुड़, नमक और तिल के बनाएं. ऐसे पांच पैकेट बनाकर जरूरतमंदों को दान कर दें. इन तीनों ही उपायों को करते समय मन ही मन भगवान की प्रार्थना करें कि आपके संबंध अपने पिताजी के साथ अच्छे हो जाएं. 

पिताजी को उपहार जरूर भेंट करें

मकर संक्रांति के दिन इस उपाय को करने से आपको विशेष फलों की प्राप्ति होगी. अगर आपके पिताजी आपके साथ तीर्थ पर जाना पसंद नहीं करते हैं, तो आप अकेले ही जाए और इन उपायों को करें. जब तीर्थ से वापस आए तो अपने पिता जी से अवश्य मिलें, उन्हें प्रणाम करके उन्हें मनपसंद उपहार भेंट करें. 

अगर आपके पिता आपके साथ तीर्थ क्षेत्र पर जाते हैं, तो उनके पसंद का कोई भी उपहार उन्हें भेंट करें. आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपके अपने पिता के साथ संबंध बेहतर होते चले जाएंगे. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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