बेलुर मठ में गढ़ा जाता है युवाओं का चरित्र, 28 साल से कम उम्र के ग्रेजुएट ही बनते हैं संन्यासी
राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर जब पूरे देश में युवाओं की भूमिका, उनके भविष्य और उनकी दिशा पर चर्चा हो रही है, तब पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्थित बेलुर मठ एक अलग ही मिसाल पेश करता नजर आता है. यह वही पवित्र स्थान है, जिसे स्वामी विवेकानंद ने स्थापित किया था. यहां आज भी युवाओं को उनके आदर्शों, विचारों और जीवन मूल्यों से जोड़ने का काम किया जा रहा है.
बेलुर मठ की सबसे खास बात यह है कि यहां युवाओं को ही संन्यासी बनाया जाता है. मठ के नियमों के अनुसार संन्यासी बनने के लिए उम्र 28 साल से कम होना जरूरी है और उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना अनिवार्य है. मठ का मानना है कि युवा उम्र में लिया गया संकल्प जीवनभर समाज और देश के लिए मजबूत आधार बनता है.
स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक
मठ की शारदापीठ के सचिव स्वामी शुकदेवानंद बताते हैं कि समय कितना भी बदल जाए, तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, लेकिन स्वामी विवेकानंद के विचार कभी पुराने नहीं होते. उनका कहना है कि आज की दुनिया भले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के दौर में जी रही हो, लेकिन विवेकानंद के आदर्श आज भी युवाओं को सही दिशा देने का काम कर रहे हैं.
उनके अनुसार सोशल मीडिया की चमक-दमक युवाओं का ध्यान भटका सकती है, लेकिन विवेकानंद के विचार उन्हें आत्मबल, सेवा और अनुशासन की राह दिखाते हैं. बेलुर मठ में आने वाले युवा इन मूल्यों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करते हैं.
देशभर में हो रहे युवा सम्मेलन
बेलुर मठ केवल एक धार्मिक स्थान ही नहीं है, बल्कि यह युवाओं के विकास का बड़ा केंद्र भी है. मठ के असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी स्वामी बलभद्रनंद बताते हैं कि रामकृष्ण मिशन के इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर के तहत हर साल करीब 300 युवा सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं. इन सम्मेलनों में युवा स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके विचारों और समाज सेवा के महत्व को समझते हैं.
इसके अलावा देशभर में रामकृष्ण मिशन के करीब 290 केंद्रों पर यूथ सेल सक्रिय हैं, जहां रोजाना युवाओं को मूल्य आधारित शिक्षा दी जाती है. यहां पढ़ाई के साथ-साथ चरित्र निर्माण, अनुशासन और सेवा भावना पर भी जोर दिया जाता है.
विदेशों से भी आते हैं युवा
बेलुर मठ की पहचान केवल भारत तक सीमित नहीं है. यहां विदेशों से भी लोग और युवा आते हैं, जो स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा लेना चाहते हैं. स्वामी शुकदेवानंद बताते हैं कि स्वामी विवेकानंद ने यहां कई साल बिताए थे. मठ परिसर में उनका कमरा आज भी सुरक्षित है और उनकी महासमाधि भी यहीं स्थित है.
यह स्थान सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला है. यहां आने वाला हर व्यक्ति शांति, सेवा और आत्मचिंतन का अनुभव करता है. यही कारण है कि बेलुर मठ को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगम के रूप में देखा जाता है. Ko
यह भी पढ़ें – सेना में अफसर बनने के लिए कौन सा एग्जाम देना होता है, कैसे होती है पढ़ाई? जानें सबकुछ
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
