भारतीय सेना समय के साथ खुद को लगातार मजबूत और आधुनिक बना रही है. बदलते युद्ध के तरीकों और सीमाओं पर बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए सेना ने एक नई और खास बटालियन तैयार की है, जिसे भैरव बटालियन नाम दिया गया है. यह बटालियन न सिर्फ देश की सीमाओं की रक्षा करेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर देश के भीतर भी बड़े और कठिन ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम होगी.
भैरव नाम भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक है. इसी सोच के साथ इस बटालियन का गठन किया गया है. इसके प्रतीक चिन्ह पर लिखा है अदृश्य और अदम्य, यानी दुश्मन की नजर से दूर रहकर उसे मात देने वाली ताकत. यह बटालियन करीब 250 चुने हुए जवानों की टीम है, जिसमें इंफेंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, सिग्नल और अन्य सहायक यूनिट्स के सैनिक शामिल हैं.
भैरव बटालियन में कैसे मिलती है नौकरी
भैरव बटालियन में सीधे तौर पर कोई भर्ती नहीं होती. इसमें शामिल होने के लिए सबसे पहले भारतीय सेना को ज्वाइन करना जरूरी है. सेना में सेवा दे रहे ऐसे जवान, जो अपने काम, अनुशासन और साहस से बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उन्हें भैरव बटालियन के लिए चुना जाता है.
चयन के दौरान जवानों की शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती, हथियार चलाने की क्षमता और कठिन हालात में फैसले लेने की योग्यता को परखा जाता है. यानी भैरव बटालियन में वही सैनिक शामिल होते हैं, जो पहले ही खुद को सेना में साबित कर चुके हों.
कितनी होती है भैरव बटालियन के जवानों की सैलरी
भैरव बटालियन में तैनात जवानों की सैलरी भारतीय सेना के अन्य जवानों जैसी ही होती है. रैंक के अनुसार उन्हें वेतन दिया जाता है. हालांकि, खास जिम्मेदारियों और जोखिम भरे काम के कारण उन्हें कुछ अतिरिक्त भत्ते मिल सकते हैं.
सेना के नियमों के तहत इनमें फील्ड एरिया अलाउंस, हाई रिस्क ड्यूटी भत्ता और अन्य सुविधाएं शामिल हो सकती हैं. कुल मिलाकर, भैरव बटालियन में सेवा का मतलब सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि सम्मान और देश सेवा का बड़ा मौका होता है.
क्यों खास है भैरव बटालियन
भैरव बटालियन को खास तौर पर तेज, सटीक और घातक ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है. इसके जवान क्लोज कॉम्बैट में माहिर हैं और उनके पास आधुनिक हथियार मौजूद हैं. इनमें AK-203 जैसे ताकतवर हथियार, लंबी दूरी तक निशाना साधने वाले स्नाइपर और दुश्मन के बड़े हथियारों को नष्ट करने वाले रॉकेट लॉन्चर शामिल हैं.
यह बटालियन छोटे स्तर के ऑपरेशन से लेकर बड़े और जोखिम भरे मिशन तक हर चुनौती के लिए तैयार रहती है. इसे स्पेशल फोर्स और सामान्य इंफेंट्री के बीच की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. इसकी फुर्ती और ताकत इसे एक तरह की लाइट कमांडो फोर्स बनाती है.
चीन और पाकिस्तान सीमा पर अहम भूमिका
भैरव बटालियन को खासतौर पर चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इन इलाकों में तेजी से कार्रवाई करने, दुश्मन को चौंकाने और कम समय में मिशन पूरा करने के लिए इस बटालियन को डिजाइन किया गया है. कठिन इलाकों और बदलते हालात में यह बटालियन सेना की बड़ी ताकत साबित हो सकती है.
आधुनिक ट्रेनिंग और नई तकनीक
भैरव बटालियन को करीब पांच महीने पहले तैयार किया गया है. इसके जवान सिर्फ हथियार चलाने में ही नहीं, बल्कि ड्रोन ऑपरेशन, संचार व्यवस्था, मेडिकल इमरजेंसी, विस्फोटक निष्क्रिय करने और डिजिटल युद्ध में भी प्रशिक्षित हैं.
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