आउट ऑफ सिलेबस सवालों से नाराज UPSSSC अभ्यर्थी, न्याय की गुहार लेकर पहुंचे मुख्यमंत्री दरबार


उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की हाल ही में हुई परीक्षा को लेकर प्रदेश भर में अभ्यर्थियों का गुस्सा सामने आ रहा है. सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी अपनी नाराजगी और मांगों को लेकर लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे. इन अभ्यर्थियों का आरोप है कि UPSSSC की परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर, यानी आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न पूछे गए, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिर गया.

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. आयोग द्वारा जारी सिलेबस के अनुसार ही उन्होंने किताबें खरीदीं, कोचिंग की और दिन-रात मेहनत की. लेकिन जब परीक्षा हुई, तो कई ऐसे सवाल सामने आए, जिनका सिलेबस से कोई लेना-देना नहीं था. अभ्यर्थियों के अनुसार, इन प्रश्नों को बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के प्रश्नपत्र में जोड़ दिया गया, जो पूरी तरह से गलत है.

लखनऊ पहुंचे अभ्यर्थियों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से युवा शामिल थे. किसी ने आगरा से यात्रा की, तो कोई प्रयागराज, गोरखपुर, वाराणसी और मेरठ जैसे शहरों से आया. सभी की एक ही मांग थी कि आउट ऑफ सिलेबस पूछे गए सवालों को निरस्त किया जाए और अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ अन्याय न हो.

क्या बोले कैंडिडेट्स?

अभ्यर्थियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर आयोग को सिलेबस में कोई बदलाव करना था, तो इसकी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी. अचानक परीक्षा में नए तरह के सवाल पूछ लेना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि लाखों युवाओं की मेहनत का अपमान भी है. कई अभ्यर्थियों ने बताया कि परीक्षा के बाद वे मानसिक तनाव में हैं और उन्हें डर सता रहा है कि कहीं उनकी वर्षों की तैयारी बेकार न चली जाए.

सीएम से अपील

मुख्यमंत्री दरबार पहुंचे युवाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री हमेशा युवाओं के हित में फैसले लेते आए हैं और उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में भी न्याय मिलेगा. अभ्यर्थियों ने कहा कि वे किसी तरह का हंगामा नहीं चाहते, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं.

प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की मुलाकात मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों से भी हुई. बताया गया कि अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सचिव से अपनी बात रखी. सचिव की ओर से कहा गया कि पूरे मामले को देखा जाएगा और इसके लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया है. हालांकि अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें अब तक किसी तरह का लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है.

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