लाखों की कार खरीदने वाले 100 रुपये के लिए करते हैं कंजूसी, 50 फीसदी के पास तो इंश्योरेंस भी नहीं, क्या होगा ऐसे लोगों का?
What if Insurance Expire : हाल में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के 50 फीसदी से ज्यादा लोगों ने वाहनों का इंश्योरेंस तक नहीं कराया है. इतना ही नहीं 30 फीसदी लोगों ने ही पीयूसीसी बनवाया है. कानून के हिसाब से ऐसे लोगों का आखिर क्या होगा.
100 में से 70 वाहनों के पास नहीं है पीयूसी सर्टिफिकेट. नई दिल्ली. हर महीने कारों की बिक्री वाली रिपोर्ट देखकर तो यही लगता है कि देश में लोगों के पास पैसों की बाढ़ आ गई है. एक से बढ़कर एक लग्जरी कारों की बिक्री बढ़ती ही जा रही है. लोग नई-नई मॉडल की कारें खरीद रहे हैं, लेकिन महज 100 रुपये खर्च करने में कंजूसी कर जाते हैं. इससे न सिर्फ उन्हें नुकसान होता है, बल्कि दूसरों को भी परेशानी होती है. हाल में आई एक रिपोर्ट में दावा किया है कि आधे से ज्यादा लोग अपनी कारों का इंश्योरेंस नहीं कराते और 100 में से 70 लोग तो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट तक नहीं बनवाते. कानूनी तौर पर ऐसे लोगों के साथ आखिर क्या होगा.
CARS24 और ORBIT की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगी-महंगी कार खरीदने वाले लोग किस कदर अपनी लाखों की गाड़ी के प्रति बेरुखा रवैया अपनाते हैं. सरकार की ओर से सख्त कानून बनाने और लगातार जागरुकता फैलाने के बावजूद लोग न तो इंश्योरेंस खरीद रहे हैं और न ही पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUCC) बनवाते हैं. इस रिपोर्ट में जो दावे किए जा रहे हैं, वह काफी चौंकाने वाले हैं और इससे लोगों की लापरवाही भी खुलकर सामने आती है.
क्या दिखाते हैं आंकड़े
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में 50 फीसदी वाहनों के पास वैलिड इंश्योरेंस तक नहीं है. इसमें सबसे ज्यादा संख्या तो दोपहिया वाहनों की है. हालत ये है कि दिल्ली, यूपी, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में तो 30 फीसदी से भी कम लोगों के पास पॉल्यूशन सर्टिफिकेट हैं. एक तरफ जहां साल दर साल वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है, तो वहीं इन मानकों के पालन में लगातार गिरावट आती जा रही है.
मानकों के पालन में कितनी लापरवाही
आंकड़े बताते हैं कि इन मानकों पालन में घोर लापरवाही बरती जा रही है. आंध्र प्रदेश और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों में अनुपालन दर 9.6 फीसदी है, जबकि उत्तरी राज्या में यह आंकड़ा 5.6 फीसदी है. उत्तरी राज्यों की सबसे बड़ी समस्या लैप्स इंश्योरेंस हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों में सबसे बड़ी समस्या पॉल्यूशन सर्टिफिकेट का उल्लंघन है. महाराष्ट्र में मानकों के पालन की दर सिर्फ 1.9 फीसदी है, जबकि राजस्थान में यह आंकड़ा 6.74 फीसदी के साथ कुछ बेहतर है.
चालान भी नहीं भर रहे लोग
रिपोर्ट में बताया गया है कि जून, 2024 से 2025 के बीच फास्टैग से भुगतान में 17 फीसदी से भी ज्यादा का उछाल आया है, जबकि इसमें औसत बैलेंस भी 400 रुपये से ज्यादा का रहने लगा है. इससे पता चलता है कि डिजिटल और कानूनी अनुपालन के बीच किस कदर अंतर हो गया है. इतना ही नहीं, लोग चालान का पैसा भी नहीं भर रहे हैं. साल 2015 से अब तक 5.11 लाख करोड़ रुपये का चालान काटा गया है, जिसमें से महज 1.92 लाख करोड़ रुपये का ही भुगतान किया गया. अभी तक 3.18 लाख करोड़ रुपये का चालान नहीं भरा गया है और 7.69 करोड़ चालान कोर्ट में पेंडिंग हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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