फतवा क्या है? जानें इस्लाम में इसका मतलब, कौन जारी करता है और क्या है इसकी अहमियत?


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Fatwa in Islam: फतवा शब्द कई मौकों पर चर्चा का विषय रहा है. खास बात ये है कि, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा फतवे दारुल उलूम देवबंद द्वारा जारी किए जाते हैं.

दारुल उलूम का कहना है कि, फतवे शरीयत की रोशनी में मुसलमानों की रहनुमाई (मार्गदर्शन) करते हैं. आइए जानते हैं कि, इस्लाम धर्म में फतवे का मतलब क्या है और इसे कौन जारी करता है?

फतवा क्या है?

फतवा को सरल भाषा में समझे तो फतवा इस्लाम से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कुरान और हदीस के हिसाब से हुक्म जारी करने को फतवा कहा जाता है. यह कुरान और हदीस की रहनुमाई (मार्गदर्शन) में किसी मसले की व्याख्या होती है.

फतवा एक राय होती है, और यह कभी भी अपनी तरफ से जारी नहीं की जाती है, इसके लिए सबसे जरूरी है कि, याचिकाकर्ता फतवे के लिए लिखित रूप से आवेदन किया हो.

किसी भी व्यक्ति पर उसे मानने की बाध्यता नहीं है. याद रखना जरूरी है कि, अल्लाह की कही गई बातों को ही कुरान, जबकि पैगंबर मोहम्मद (स) की कही गई बातों को हदीस कहा जाता है.

कौन जारी करता है फतवा?

जहां तक फतवे की बात की जाए तो इसे हर कोई जारी नहीं करता है. इसे कोई मुफ्ती ही जारी कर सकता है, वो भी मुफ्ती किसी शरिया अदालत में जिम्मेदार पद को संभालता हो.

फतवा जारी करने और मुफ्ती बनने के लिए इसकी पढ़ाई करनी होती है, जिसमें उन्हें कुरान, हदीस के साथ इस्लाम न्यायशास्त्र और तर्कशास्त्र के बारे में भी पढ़ाया जाता है. इसके साथ ही उसे इस्लाम धर्म से जुड़ी काफी जानकारी भी होनी चाहिए. 

भारत में सहारनपुर का देवबंद मदरसा, बरेली मदरसा के साथ राज्यों के शरिया अदालत इसे जारी करते हैं. भारत का कानून और संविधान भी शरिया अदालतों को मान्यता देता है.

मुल्ला कौन है?

इस्लाम में मुल्ला कोई आधिकारिक पद नहीं है. यह आमतौर पर उन व्यक्तियों के लिए किया जाता है, जिसके पास इस्लामी शिक्षा हो और मस्जिद या मदरसे से जुड़ा हो. कई स्थानों पर यह केवल लोकल धार्मिक व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है.

मौलवी कौन है?

मौलवी कुरान, हदीस, फिक्ह करने वाला व्यक्ति, जो नमाज पढ़ाता है, धार्मिक शिक्षा और सलाह देने का काम करता है. हर मौलवी के पास फतवा जारी करने का अधिकार नहीं होता है.

इमाम कौन है?

इस्लाम में इमाम का मतलब नमाज का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति होता है. मस्जिद में नमाज पढ़ाने के साथ प्रवचन देता है. इमाम के पास भी फतवा जारी करने का अधिकार नहीं होता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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