Electric Vehicle Price Hike : चीन के टैक्स छूट घटाने का सबसे गहरा प्रभाव उन कंपनियों पर पड़ेगा जो अपनी बैटरी सप्लाई के लिए चीनी दिग्गजों जैसे BYD और CATL पर निर्भर हैं. इससे बैटरी की कीमत बढेगी और इससे भारत में ईवी महंगे हो जाएंगे.
भारत में अधिकांश टू-व्हीलर निर्माता अभी भी ‘सेल’ (Cell) के लिए चीन पर निर्भर हैं.नई दिल्ली. भारत में आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में इजाफा हो सकता है. ऐसा चीन द्वारा लिथियम-आयन बैटरियों पर दी जाने वाली निर्यात कर छूट (Export Tax Rebate) में की गई कटौती के कारण होगा. मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपनी लिथियम-आयन बैटरियों पर एक्सपोर्ट टैक्स रिबेट को 9% से घटाकर 6% करने का निर्णय लिया है. यह फैसला 1 अप्रैल से प्रभावी होगा. इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि चीन अगले एक साल के भीतर इस प्रोत्साहन को पूरी तरह से समाप्त करने की योजना बना रहा है. इस फैसले से ईवी वाहनों में यूज होने वाली बैटरियों की लागत बढ़ेगी.
किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन की कुल निर्माण लागत में बैटरी की हिस्सेदारी एक-तिहाई (33%) से अधिक होती है, इसलिए निर्यात छूट में कमी का सीधा मतलब बैटरी की कीमतों में बढ़ोत्तरी है. यह निर्णय तब आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में लिथियम की कीमतें पहले से ही बढ़ रही हैं. बैटरियों की कीमत बढने से भारतीय ईवी कंपनियों के मार्जिन पर दोहरा दबाव पड़ेगा.
किन कंपनियों पर होगा सबसे ज्यादा असर?
चीन के इस फैसले का सबसे गहरा प्रभाव उन कंपनियों पर पड़ेगा जो अपनी बैटरी सप्लाई के लिए चीनी दिग्गजों जैसे BYD और CATL पर निर्भर हैं. भारतीय बाजार में प्रमुख खिलाड़ी जैसे Tata Motors (टाटा मोटर्स) और MG Motor India, जो अपने पैसेंजर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बड़े पैमाने पर बैटरी पैक या सेल चीन से आयात करते हैं, उन्हें अपनी उत्पादन लागत को फिर से मैनेज करना होगा.
ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी और टीवीएस मोटर्स जैसी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों पर भी इसका असर होने की आशंका है. भारत में अधिकांश टू-व्हीलर निर्माता अभी भी ‘सेल’ (Cell) के लिए चीन पर निर्भर हैं. जिन कंपनियों ने लंबी अवधि के फिक्स्ड-प्राइस अनुबंध नहीं किए हैं और जो ‘अल्पकालिक सोर्सिंग’ (Short-term sourcing) के जरिए बैटरियां मंगवाती हैं उनके लिए कीमतें रातों-रात बढ़ सकती हैं.
दो हफ्ते में दिख सकता है असर
एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस टैक्स कटौती का असर अगले दो हफ्तों के भीतर भारतीय बाजार में दिखने लगेगा. कंपनियां टैक्स रिबेट के पूरी तरह घटने से पहले तेजी से अपनी इन्वेंट्री (स्टॉक) जमा करने की कोशिश करेंगी ताकि कुछ समय तक पुरानी कीमतों पर काम चलाया जा सके. हालांकि, लंबी अवधि में यह अतिरिक्त लागत ग्राहकों की जेब पर ही पड़ने वाली है. यदि बैटरी महंगी होती है, तो ईवी की कीमतें बढ़ेंगी.
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