नीदरलैंड्स में कर्मचारी ने मांगा WFH, बॉस के जवाब ने जीता लोगों का दिल ; सोशल मीडिया पर हुआ वायरल


आज के समय में जब काम का दबाव और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस बनाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है, ऐसे में विदेश से आई एक कहानी ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा है. यह कहानी है नीदरलैंड्स में काम कर रहीं भारतीय पेशेवर अश्विनी थामके की, जिनका एक्सपीरियंस न सिर्फ इमोशनल कर देने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक सेंसिटिव वर्कप्लेस संस्कृति कैसी हो सकती है. 

अचानक आई पारिवारिक परेशानी

अश्विनी थामके नीदरलैंड्स में नौकरी कर रही थीं, तभी उनके परिवार में अचानक एक गंभीर मेडिकल आपातकाल आ गया. हालात ऐसे थे कि उन्हें बिना ज्यादा योजना बनाए तुरंत भारत लौटना पड़ा. इस दौरान उनके मन में सबसे बड़ी चिंता यह थी कि वे अपने ऑफिस और मैनेजर को यह बात कैसे बताएं. 

भारत में काम कर चुके कई लोगों की तरह, उन्हें भी डर था कि कहीं उनसे मुश्किल सवाल न पूछ लिए जाएं, या छुट्टी और घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) की मांग को लेकर असहज माहौल न बन जाए. 

मैनेजर से बात करने की हिम्मत

भारत पहुंचने के बाद अश्विनी ने अपने मैनेजर से संपर्क किया. उन्होंने साफ तौर पर अपनी पारिवारिक स्थिति के बारे में बताया और यह पूछा कि क्या वे कुछ समय के लिए मुंबई से काम कर सकती हैं. उनके मन में यह आशंका थी कि शायद उन्हें काम और परिवार में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर किया जाएगा. लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह उनके लिए बिल्कुल हैरान करने वाला था. 

बॉस का जवाब जिसने दिल जीत लिया

अश्विनी के मैनेजर ने बिना किसी हिचकिचाहट के न सिर्फ उनकी स्थिति को समझा, बल्कि पूरी समझदारी के साथ जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अगर अश्विनी खुद को सक्षम महसूस करें, तो वे भारत से काम कर सकती हैं और अगर उन्हें काम से पूरी तरह दूर रहना पड़े, तो वे बेझिझक छुट्टी लें. मैनेजर का साफ संदेश था परिवार सबसे पहले आता है, तनाव मत लीजिए. यह जवाब अश्विनी के लिए किसी राहत से कम नहीं था. उन्होंने बताया कि उस बातचीत में काम से ज्यादा उनकी सेहत और मानसिक स्थिति को प्राथमिकता दी गई. 

भारतीय वर्कप्लेस से अलग एक्सपीरियंस

इस अनुभव को याद करते हुए अश्विनी ने कहा कि यह प्रतिक्रिया उनके लिए बिल्कुल नई थी. भारत में कई बार कर्मचारी आपात स्थिति में भी छुट्टी मांगने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें नौकरी, प्रमोशन या छवि खराब होने का डर सताता है.  इसी पृष्ठभूमि से आने के कारण, नीदरलैंड्स में मिले इस भरोसे और मानवीय व्यवहार ने उन्हें भावुक कर दिया. उन्हें लगा कि यहां वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि वास्तव में अपनाया जाता है. 

सोशल मीडिया पर शेयर की कहानी

अश्विनी ने अपने इस एक्सपीरियंस को इंस्टाग्राम पर शेयर किया. उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई. कई यूजर्स ने नीदरलैंड्स की कार्य संस्कृति की तारीफ की, तो वहीं कुछ लोगों ने कहा कि भारत में भी उन्हें ऐसे सहायक बॉस मिल चुके हैं.

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अच्छी कार्य संस्कृति सिर्फ देश पर नहीं, बल्कि मैनेजमेंट और टीम के रवैये पर निर्भर करती है. वहीं कई यूजर्स का मानना था कि सहानुभूति और सम्मान, किसी भी आर्थिक लाभ से ज्यादा कर्मचारियों को प्रेरित करता है. 

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