Basant Panchmi 2026: क्या आप जानते हैं? हिंदू ही नहीं, मुस्लिम और सिख भी मनाते हैं बसंत पंचमी! जानें रोचक तथ्य?


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Basant Panchmi 2026: वसंत पंचमी का उत्सव हर साल माघ शुक्ल पंचमी तिथि को मनाई जाती है. इस साल ये त्योहार 23 जनवरी 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा.

वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा भी कहा जाता है, जो ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत के देवी हैं. क्या आप जानते हैं कि, बसंत पंचमी का त्योहार केवल हिंदुओं का ही पर्व नहीं, बल्कि मुस्लिम और सिख परंपराओं में भी इसकी झलक देखने को मिलती है. आइए जानते हैं इसके बारे में?

मुस्लिम परंपरा में बसंत पंचमी?

बसंत पंचमी का त्योहार दिल्ली सल्तनत और मुगल काल में एक बड़ा दरबारी उत्सव था. इस बात का सबसे ठोस प्रमाण हजरत निजामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो से जुड़ा है. 

  • कई इतिहासकार मानते हैं कि, अमीर खुसरो ने बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनकर गीत लिखे, 

‘आओ बसंत बहार, पीत पहिरो हो यार’

  • निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में आज भी बसंत पंचमी के मौके पर पीले फूल चढ़ाने की परंपरा है.

वहीं मुगल बादशाहों विशेष तौर पर जहांगीर और शाहजहां के समय में बसंत को स्प्रींग फेस्टिवल की तरह मनाया जाता था. जिसमें लोग मिलकर पतंगबाजी, फूलों की सजावट और संगीत का लुत्फ उठाते थें. 

सिख परंपराओं में बसंत पंचमी का उत्सव

सिख इतिहास में बसंत पंचमी की परंपरा सदियों पुरानी है. यह पंजाब में पीले सरसों के खेत का प्रतिनिधित्व करता है. बसंत पंचमी के दिन ही अमृतसर के हरमंदिर साहिब में संगीतकार बसंत राग कीर्तन का आयोजन करते हैं.

यह वैशाख के पहले दिन तक जारी रहती है. छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद जी का जन्म 1595 में हुआ था. उनके जन्मदिन के मौके पर अमृतसर के नजदीक वडाली स्थित छेहरता साहिब गुरुद्वारे में बसंत पंचमी का मेला लगता है. 

वही छेहरता साहिब में बसंत पंचमी के मौके पर पतंगबाजी की जाती है. 1677 में बसंत पंचमी के दिन ही दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह का विवाह बीबी जीतू जी से लाहौर में हुआ था. हर वर्ष बसंत पंचमी के दिन गुरु का लाहौर से तख्त श्री केसरगढ़ साहिब तक नगर कीर्तन निकाला जाता है.

ईसाई परंपराओं में बसंत पंचमी का महत्व

वसंत ऋतु की शुरुआत के साथ ही दुनियाभर में ईसाई ईस्टर मनाते हैं, जो यीशु मसीह के पुनरुत्थान को समर्पित एक पर्व है. इस दौरान अधिकतर ईसाई अपनी प्रिय चीजों का त्याग किया जाता है. कुछ लोग मांसाहार छोड़ते हैं, जबकि कुछ लोग धूम्रपान और शराब पीना छोड़ा देते हैं.  

ईसाइयों के लिए इस दिन की शुरुआत चर्च में प्रार्थना के साथ होती है. परिवार और दोस्तों के बीच फूल और ईस्टर अंडे का आदान प्रदान किया जाता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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