गाजियाबाद: तीन बहनों की मौत, ऑनलाइन कोरियन लव गेम का खतरा
जांच के दौरान मिले सुसाइड नोट में लिखा था कि कोरिया ही उनकी जिंदगी है और वे उसे छोड़ नहीं सकतीं. यह बयान बताता है कि बच्चे किस हद तक वर्चुअल दुनिया में डूब चुके थे. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि गेम में दिए जा रहे टास्क धीरे धीरे मानसिक नियंत्रण और आत्मघाती सोच की ओर ले जा रहे थे. इसी केस ने एक बार फिर ऐसे ऑनलाइन चैलेंज गेम्स पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कोरियन लव गेम से ब्लू व्हेल तक
गाजियाबाद का मामला कोई अलग थलग घटना नहीं है, बल्कि यह उस खतरनाक ट्रेंड का हिस्सा है जो बीते कुछ वर्षों से दुनिया भर में देखा जा रहा है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ टास्क और चैलेंज आधारित गेम बच्चों और किशोरों की भावनात्मक कमजोरी, अकेलेपन और पहचान की तलाश का फायदा उठाते हैं.
ऐसे गेम आम वीडियो गेम्स से अलग होते हैं. इनमें खिलाड़ी को एक व्यक्ति, ग्रुप या वर्चुअल किरदार से जोड़ा जाता है, जो धीरे धीरे उसकी सोच और फैसलों पर नियंत्रण बनाने लगता है. शुरुआत में यह जुड़ाव दोस्ती या प्यार जैसा लगता है, लेकिन आगे चलकर मानसिक दबाव, डर और भावनात्मक ब्लैकमेल का रूप ले लेता है.
ब्लू व्हेल और एफ57 जैसे डेथ ग्रुप्स
ब्लू व्हेल चैलेंज (Blue Whale Challenge) और उससे पहले एफ57 (F57) जैसे रूसी सोशल मीडिया ग्रुप्स को इस श्रेणी का सबसे खतरनाक उदाहरण माना जाता है. इन ग्रुप्स में कई दिनों तक टास्क दिए जाते थे, जिनकी शुरुआत सामान्य गतिविधियों से होती थी और अंत आत्म नुकसान और आत्महत्या पर होता था. कई मामलों में बच्चों को परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई.
मोमो और जोनाथन गैलिंडो जैसे डर आधारित ट्रेंड
मोमो चैलेंज (Momo Challenge) और जोनाथन गैलिंडो (Jonathan Galindo) जैसे ट्रेंड्स ने डरावनी तस्वीरों और धमकी भरे संदेशों का सहारा लिया. हालांकि कुछ मामलों को अफवाह कहा गया, लेकिन इन ट्रेंड्स के दौर में भारत और विदेशों में आत्म नुकसान और आत्महत्या से जुड़े मामले सामने आए, जिससे इनका खतरा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
ओशन व्हेल और सुसाइड पैक्ट फोरम
ओशन व्हेल या सी ऑफ व्हेल्स (Ocean Whales) जैसे ऑनलाइन फोरम्स में सुसाइड पैक्ट और आत्म नुकसान को बढ़ावा दिया जाता रहा है. सोशल मीडिया हैशटैग और ग्रुप्स के जरिए बच्चों से सबूत मांगे जाते थे, जिससे एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति बढ़ी.
साइकोलॉजिकल गेम्स और मानसिक ट्रिगर
डोकी डोकी लिटरेचर क्लब (Doki Doki Literature Club) जैसे साइकोलॉजिकल हॉरर गेम्स को लेकर भी चिंता जताई गई है. इनमें आत्महत्या और मानसिक टूटन को अप्रत्याशित तरीके से दिखाया जाता है, जो पहले से तनाव या डिप्रेशन झेल रहे खिलाड़ियों के लिए ट्रिगर बन सकता है.
पबजी और गेमिंग एडिक्शन का पहलू
पबजी (PUBG) जैसे लोकप्रिय ऑनलाइन गेम्स को भी कई आत्मघाती घटनाओं से जोड़ा गया है. इन मामलों में गेम की लत, हार का तनाव, पैसों का नुकसान या माता-पिता की रोक टोक के बाद बच्चों द्वारा आत्महत्या करने की खबरें सामने आई हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां समस्या गेम से ज्यादा उसकी लत और उससे पैदा हुआ मानसिक दबाव होता है.
विशेषज्ञ क्या चेतावनी देते हैं
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे चैलेंज गेम बच्चों को यह महसूस कराते हैं कि उनकी असली पहचान और महत्व केवल उसी डिजिटल दुनिया में है. धीरे धीरे वे वास्तविक जीवन से कटने लगते हैं और खतरनाक फैसले लेने लगते हैं.
सतर्कता ही बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि माता पिता और शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, डर, चुप्पी या मोबाइल से अत्यधिक जुड़ाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए. समय पर बातचीत और मानसिक सहयोग ही ऐसे खतरनाक डिजिटल जाल से बच्चों को बाहर निकाल सकता है.
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
