Elon Musk का Starlink स्मार्टफोन: AI और सैटेलाइट कनेक्टिविटी
दरअसल, यह पूरा मामला X (पहले Twitter) पर शुरू हुआ. किसी यूज़र ने लिखा, ‘Starlink फोन आ जाए तो कितना जबरदस्त होगा.’ इस पर Musk ने जवाब दिया कि यह आइडिया ‘किसी दिन हो सकता है, नामुमकिन नहीं है.’ बस, इतना कहना था और इंटरनेट पर कयासों की बाढ़ आ गई कि आखिर Starlink फोन होगा कैसा.
Starlink को खास बनाता क्या है?
स्टारलिंक पहले से ही लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स के ज़रिए इंटरनेट देता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत यही है कि ये उन इलाकों में भी कनेक्टिविटी पहुंचा रहा है, जहां मोबाइल टावर या ब्रॉडबैंड पहुंचना मुश्किल है. अब सोचिए, अगर कोई फोन सीधे स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़ जाए. मतलब जंगल, पहाड़, रेगिस्तान या किसी रिमोट गांव में भी नेटवर्क की टेंशन खत्म. इमरजेंसी के वक्त तो ऐसा फोन सच में गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
ये कोई आम स्मार्टफोन नहीं होगा
मस्क के इशारों से साफ है कि अगर ऐसा फोन बना, तो वह iPhone या Android जैसा आम डिवाइस नहीं होगा. उन्होंने कहा कि ये फोन पूरी तरह इस बात पर फोकस करेगा कि कम से कम बैटरी में ज्यादा से ज्यादा AI परफॉर्मेंस निकाली जा सके. यानी कैमरा मेगापिक्सल या नए-नए ऐप्स से ज्यादा ज़ोर होगा दमदार AI और खास न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट्स पर.
AI होगा इस फोन का असली हीरो
मस्क काफी समय से AI के भविष्य की बात करते आए हैं. xAI और Grok जैसे प्रोजेक्ट्स इसका उदाहरण हैं. ऐसे में स्टारलिंक फोन अगर आया, तो उसमें AI सबसे अहम रोल निभा सकता है. हो सकता है फोन पर ही एडवांस AI मॉडल चलें, वो भी बिना इंटरनेट के, या सैटेलाइट के ज़रिए कुछ बिल्कुल नए AI फीचर्स मिलें. मस्क की दूसरी कंपनियों के साथ इसका तालमेल भी देखने लायक हो सकता है.
तो क्या यह सच में आएगा?
फिलहाल मस्क ने सिर्फ दरवाज़ा खुला रखा है, कोई टाइमलाइन या कन्फर्मेशन नहीं दी है. लेकिन अगर Starlink फोन हकीकत बनता है, तो यह स्मार्टफोन की दुनिया में बड़ा झटका दे सकता है. सैटेलाइट कनेक्टिविटी और AI-फर्स्ट अप्रोच के साथ शायद iPhone और Android को पहली बार ‘स्पेस से’ टक्कर मिले.
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