सड़क सुरक्षा अभियान 2026 टेलीथॉन MoRTH NHAI के साथ सुरक्षित सड़कें.
इस वर्ष के टेलीथॉन की थीम ‘परवाह से कर्तव्य तक’रही, जो यह संदेश देती है कि सड़क पर चलने वाले दूसरे यात्रियों की सुरक्षा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है. सड़क सुरक्षा अभियान 2026 चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है — अनुशासन (कायदा), दायित्व (कर्तव्य), सुरक्षा (कवच) और परिवर्तन (क्रांति).
टेलीथॉन की शुरुआत में अमिताभ बच्चन ने कहा कि अनुशासन और कर्तव्यबोध की भावना के बिना प्रगति संभव नहीं है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक व्यक्ति का उत्तरदायित्व नहीं है, इसके लिए सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है. श्री अमिताभ बच्चन के अनुसार जब नियमों के प्रति सम्मान सबके जीवन मूल्यों से जुड़ता है, अनुशासन हर दिन की आदत बनता है और एक-दूसरे के प्रति कर्तव्य की भावना व्यवहार बन के सामने आती है, जब यह आदतें और मूल्य सब आत्मसात कर लें तभी एक सुरक्षित और जिम्मेदार भारत का सपना साकार हो सकता है.
इसके बाद श्री नितिन गडकरी ने सड़क और राजमार्ग सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए MoRTH और NHAI की प्रमुख पहलों की जानकारी दी. इनमें बड़े स्तर पर सुरक्षा ऑडिट, बेहतर राजमार्ग आधारभूत संरचना, कुशल यातायात प्रणालियां और वाणिज्यिक व निजी वाहनों के लिए सख्त अनुपालन शामिल है. इसके अलावा ट्रक चालकों की सुरक्षा के लिए केबिन में एयर कंडीशनिंग और नींद और आलस से बचाव के लिए अलर्ट सिस्टम लगाए जा रहे हैं. साथ ही, हर दोपहिया वाहन के साथ दो मानक हेलमेट अनिवार्य किए गए हैं, ताकि सुरक्षा के लिए सबकी साझी जिम्मेदारी को प्रोत्साहित किया जा सके.
अपने निजी अनुभव को सबके साथ साझा करते हुए अभिनेत्री आलिया भट्ट ने कहा कि सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि हम जो भी करते हैं उससे दूसरे और आने वाली पीढ़ियां भी प्रभावित होती हैं. परिवार के प्रति प्रेम और चिंता हमें सुरक्षित रहने की प्रेरणा देती है, जिससे सड़क सुरक्षा एक नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है. इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता विक्की कौशल ने वाहन चलाते समय भावनात्मक नियंत्रण के महत्व पर ज़ोर दिया और कहा कि अपने अहम के कारण ओवरटेक करने की कोशिश कभी नहीं करनी चाहिए.
टेलीथॉन में अन्य रचनात्मक हस्तियों ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए. अभिनेता के.के. मेनन ने सही सोच और जागरूकता पर बात की, जबकि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गीतकार स्वानंद किरकिरे ने कहा कि सड़क पर हमारे व्यवहार से अगली पीढ़ी अनजाने में सीखती है. 22 भाषाओं में सड़क सुरक्षा अभियान (SSA) का एंथम तैयार करने वाले संगीतकार और गायक शंकर महादेवन ने संगीत की भावनात्मक शक्ति पर प्रकाश डाला, जो सड़क सुरक्षा के संदेश को दिल तक पहुंचाती है.
रचनात्मकता को एक नया आयाम देते हुए, द अनिरुद्ध वर्मा कलेक्टिव ने संगीत के माध्यम से सड़क सुरक्षा का संदेश प्रस्तुत किया, जिसने लोगों में संवेदना, अनुशासन और सबकी मिली जुली जिम्मेदारी की भावना को जागृत किया. उनकी संगीतमय प्रस्तुति ने अभियान के मूल्यों को यादगार अनुभव में बदल दिया.
टेलीथॉन में विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली व्यक्तित्वों ने भी भाग लिया, जिन्होंने इस पहल को अपना सक्रिय सहयोग दिया. अडोर पावरट्रॉन के चेयरपर्सन रविन मीरचंदानी ने सड़क सुरक्षा में तकनीक और एआई आधारित समाधानों की बढ़ती भूमिका पर बात की और इस बात पर जोर दिया कि डेटा-आधारित कुशाग्रता, कुशल प्रणालियां निरंतर संचार जोखिमों का अनुमान लगाने और व्यवहार को प्रभावित करने में किस प्रकार सहयोग कर सकती हैं.
सेव लाइफ फाउंडेशन की चीफ ऑफ प्रोग्राम्स डॉ. ईलिया जाफर ने खतरा कम करने के लिए पहले से सूचित किए गए विकल्पों की आवश्यकता बताई और संस्था के Zero-Fatality Solutions पर प्रकाश डाला, जो अब MoRTH के सहयोग से देशभर में 100 ज्यादा खतरे वाले राजमार्गों (Zero-Fatality Corridor) और जिलों (Zero-Fatality Districts) में लागू किए जा रहे हैं. सेव लाइफ फाउंडेशन के ट्रस्टी एलेक्स कुरुविला ने निरंतर जागरूकता और जिम्मेदार सड़क व्यवहार के लिए प्रभावी संवाद की आवश्यकता पर ज़ोर दिया. कंटेंट क्रिएटर चटोरी रजनी ने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा साझा कर सड़क सुरक्षा के संदेश को और अधिक मानवीय और प्रभावी बनाया.
टेलीथॉन का एक भावनात्मक और प्रेरणादायक हिस्सा ‘राह-वीर सम्मान’ रहा, जिसमें उन आम नागरिकों को सम्मानित किया गया जिन्होंने दुर्घटना के दौरान देश की सड़कों पर असाधारण साहस दिखाया. इन राह-वीरों ने दुर्घटनाओं के समय आगे बढ़कर घायलों की मदद की और कई बार अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाई. उनका योगदान कर्तव्य, मानवता और संवेदनशीलता की जीती जागती मिसाल बन गया.
सड़क सुरक्षा अभियान 2026 टेलीथॉन के समापन पर यह संदेश स्पष्ट था कि सुरक्षित सड़कें केवल नियमों और प्रणालियों से नहीं बनतीं, बल्कि उन लोगों से बनती हैं जो अनुशासन को अपनी आदत बनाते हैं, परवाह करते हैं और जिम्मेदारी निभाते हैं. जब परवाह कर्तव्य बन जाती है और जागरूकता व्यवहार में बदलती है, तभी एक सुरक्षित और जिम्मेदार भारत की ओर यात्रा शुरू होती है.
इस अभियान से जुड़ें और सभी के लिए सुरक्षित सड़कें बनाने का उत्तरदायित्व निभाएं.
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