AI impact on indian IT industry | Why Nifty IT index fall | AI vs Software Engineers jobs | आईटी कंपनियों पर एआई का खतरा कितना बड़ा


भारत की IT इंडस्ट्री दशकों से देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ रही है, लेकिन अब एक नए और डेंजर्स दौर से गुजर रही है. खतरा कोई और नहीं, बल्कि आईटी कंपनियों द्वारा बनाया गया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ही है. AI के तेजी से उभरने के कारण IT कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है. जहां पहले सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, टेस्टिंग और सर्विसेज जैसी सेवाओं पर निर्भर कंपनियां चमक रही थीं, उनके बुरे दिन शुरू हो चुके हैं. बुरे दिन इसलिए, क्योंकि अब उन तमाम कार्यों को AI ऑटोमेटेड करके सीधा उनके बिजनेस मॉडल को ही चुनौती दे रहा है.

हम आंकड़ों के आधार पर बता रहे हैं कि AI कैसे IT सेक्टर को प्रभावित कर रहा है, भारत में ताजा नुकसान क्या है, TCS और Infosys जैसे दिग्गजों पर क्या असर पड़ रहा है, ग्लोबल लेवल पर स्थितियां कैसी हैं, इसके लिए कौन से AI टूल्स जिम्मेदार हैं, क्या भविष्य में सॉफ्टवेयर की जरूरत खत्म हो जाएगी, और कौन से क्षेत्र AI की पहुंच से बाहर रहेंगे. यदि आप AI के विषय में दिलचस्पी रखते हैं तो सब चीजें जानना आपके लिए जरूरी है.

भारत में IT कंपनियों की गिरावट: आंकड़ों में

जनवरी-फरवरी 2026 में भारतीय IT सेक्टर में भारी सेल-ऑफ देखा गया है. प्रमुख IT कंपनियों को ट्रैक करने वाला Nifty IT इंडेक्स 2025 की शुरुआत से अब तक लगभग 20 प्रतिशत तक गिर चुका है. फरवरी के पहले हफ्ते में ही इस इंडेक्स में 7 प्रतिशत की गिरावट आई, जो चार महीनों में सबसे खराब प्रदर्शन है. कुल मिलाकर, भारतीय IT स्टॉक्स से $22.5 बिलियन से अधिक (लगभग ₹2 लाख करोड़) का नुकसान हुआ है. इसी साल एक महीने (जनवरी 12 से फरवरी 12 तक) के भीतर IT सेक्टर की मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, और यह नुकसान केवल तीन ही दिनों में हुआ है. ध्यान रहे ये आंकड़ा 12 फरवरी 2026 तक का है. आज 13 फरवरी को भी आईटी सेक्टर में फ्री-फॉल देखने को मिला है. आज भी आईटी इंडेक्स 3 प्रतिशत गिरा हुआ है.

4 फरवरी को Nifty IT इंडेक्स लगभग 5.9 फीसदी गिरकर बंद हुआ, जो अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट है. प्रमुख कंपनियों में Infosys के शेयर 7.37 प्रतिशत गिरे, TCS 6.99%, HCL Tech 4.58%, Tech Mahindra 4.52%, और Wipro 3.79% धड़ाम हुआ. AI के कारण भारत की $283 बिलियन की IT इंडस्ट्री पर गहरा संकट मंडरा रहा है. भारतीय IT इंडस्ट्री मुख्यत: लेबर-इंटेंसिव मॉडल पर निर्भर है.

लेबर-इंटेंसिव मॉडल बोले तो क्या?

लेबर-इंटेंसिव मॉडल पर आधारित होने का मतलब है कि इसकी ग्रोथ बड़े पैमाने पर कम लागत वाले इंजीनियर्स और डेवलपर्स पर निर्भर रही है. कंपनियां जैसे TCS, Infosys आदि ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए आउटसोर्सिंग सर्विसेज प्रदान करती हैं, जिसमें कोडिंग, टेस्टिंग, मेंटेनेंस, सपोर्ट और एप्लिकेशन डेवलपमेंट जैसे रूटीन और रिपीटेटिव काम शामिल होते हैं.

ये काम ज्यादातर मैनपावर-हैवी होते हैं. प्रोजेक्ट्स की सफलता और रेवेन्यू बिल किए जा सकने लायक घंटों और कर्मचारियों की संख्या पर टिका होता है. अब तक, भारत की बड़ी युवा आबादी और कम वेतन के कारण ये मॉडल लाभदायक रहा है, जिसे अक्सर “बॉडी शॉपिंग” या स्टाफिंग-बेस्ड आउटसोर्सिंग कहा जाता है. AI के उभरने से ये रूटीन जॉब्स ऑटोमेट हो रहे हैं, जिससे इस मॉडल को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

TCS और Infosys: कौन से काम प्रभावित हो रहे हैं?

ये कंपनियां AI से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं. खासकर एंट्री-लेवल जॉब्स और बेसिक टास्क में. AI टूल्स अब बेसिक डेवलपमेंट, टेस्टिंग, और डेटा एनालिसिस जैसे कार्यों को ऑटोमेट कर रहे हैं, जो पहले इन कंपनियों के एंट्री-लेवल स्टाफ द्वारा किए जाते थे. TCS का वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में AI-संबंधित रेवेन्यू $1.8 बिलियन पहुंच गया है, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का 5.8% है. लेकिन इससे जॉब्स कम हो रही हैं. TCS में हेडकाउंट 20,000-30,000 तक कम हुआ है. Infosys ने FY26 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस 3 से 3.5% बढ़ाई, लेकिन AI से ERP इम्प्लीमेंटेशन जैसे ट्रेडिशनल कार्यों पर दबाव है.

अब इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाले समय में मिडिल मैनेजमेंट और रूटीन टास्क सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि AI प्रोजेक्ट्स को कम लोगों से पूरा कर सकता है. TCS के पास अब 217,000 AI-स्किल्ड एम्प्लॉयी हैं, जो कंपनी को AI-लेड सर्विसेज की ओर शिफ्ट करने में मदद कर रहा है. फिर भी, विश्लेषकों का अनुमान है कि AI से इंडस्ट्री के 12 प्रतिशत रेवेन्यू पर असर पड़ेगा.

दुनियाभर में IT कंपनियों का हाल

AI का प्रभाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. यह ग्लोबल भी है. यूएस, यूरोप और अन्य बाजारों में भी सॉफ्टवेयर स्टॉक्स की जड़ें भी हिल रही हैं. ग्लोबल प्राइवेट AI इन्वेस्टमेंट 2024 में $109.1 बिलियन पहुंचा, जिसमें जेनरेटिव AI पर $33.9 बिलियन खर्च हुए. 78 प्रतिशत ऑर्गनाइजेशन्स अब AI इस्तेमाल कर रही हैं, जो 2023 से 55% बढ़ा है. लेकिन इससे प्रोडक्टिविटी बढ़ने के साथ जॉब्स पर दबाव है.

McKinsey की रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेटिव AI (जैसे ChatGPT, Copilot आदि) दुनिया की अर्थव्यवस्था में हर साल $2.6 से $4.4 ट्रिलियन (लगभग ₹20-35 लाख करोड़) तक जोड़ सकता है. यह उत्पादकता बढ़ाकर होता है. सॉफ्टवेयर, मार्केटिंग और R&D में काम तेज, सस्ता और बेहतर बन सकता है.

लेकिन एक समस्या है कि AI का तेज इस्तेमाल करने से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और IT जैसे क्षेत्रों में गलतियां बढ़ रही हैं. क्यों? क्योंकि AI जल्दी कोड/डिजाइन बना देता है, लेकिन इंसान अगर ठीक से चेक न करे तो छोटी-छोटी त्रुटियां छूट जाती हैं, जो बाद में बड़ी समस्या बन सकती हैं. फायदा बड़ा है, लेकिन सावधानी से इस्तेमाल भी जरूरी, वरना क्वालिटी गिर सकती है.

2026 में AI एजेंट्स रूटीन प्रोडक्शन डिसीजन के 11-50 प्रतिशत हैंडल करेंगे, और AI ऑपरेटिंग मार्जिन्स में टॉप थ्री कंट्रीब्यूटर्स में होगा. हालांकि, सिर्फ 21 प्रतिशत कंपनियां पूरी तरह AI-रेडी हैं.

कौन से AI साबित हो रहे हैं काल?

  • Anthropic’s AI Tool: लीगल, सेल्स, मार्केटिंग और डेटा एनालिसिस को ऑटोमेट करता है, जिससे भारतीय IT फर्म्स के बेसिक टास्क पर असर.
  • ChatGPT (OpenAI): कोड जनरेशन, कंटेंट क्रिएशन और प्रॉब्लम-सॉल्विंग में माहिर, जो IT कंपनियों के रूटीन वर्क को कम कर रहा है.
  • GitHub Copilot: कोडिंग असिस्टेंट जो रीयल-टाइम सजेशन देता है, डेवलपर्स की प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है लेकिन जॉब्स घटाता है.
  • DeepSeek और Google Gemini: कोडिंग और मैथेमेटिकल रीजनिंग में सस्ते विकल्प, जो स्टार्टअप्स और डेवलपर्स के लिए अपीलिंग हैं.

ये टूल्स IT इंडस्ट्री के लेबर-इंटेंसिव मॉडल को चुनौती दे रहे हैं.

क्या भविष्य में किसी सॉफ्टवेयर की जरूरत नहीं पड़ेगी?

नहीं ऐसा नहीं है. AI सॉफ्टवेयर को पूरी तरह नहीं खा सकता. विशेषज्ञों का कहना है कि AI ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर को कंप्लीमेंट करेगा, न कि रिप्लेस. ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर $1.2 ट्रिलियन की इंडस्ट्री है, और AI बड़े सिस्टम्स को हैंडल नहीं कर सकता, जहां सेंसिटिव डेटा या रेगुलेशन शामिल हो. AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी. सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स का रोल बदलकर AI ऑर्केस्ट्रेटर्स का हो जाएगा. मतलब वले AI को काम करने का तरीका सिखाएंगे और कंट्रोल करेंगे. भविष्य में, AI से सॉफ्टवेयर क्रिएशन तेज होगा, लेकिन ह्यूमन ओवरसाइट जरूरी रहेगी.

कौन-कौन से फील्ड नहीं आएंगे AI की चपेट में?

कई क्षेत्र AI से अप्रभावित रहेंगे, क्योंकि वे इमोशनल इंटेलिजेंस, क्रिएटिविटी या फिजिकल स्किल्स पर निर्भर हैं:

  1. हेल्थकेयर: डॉक्टर्स, नर्सेस, थेरेपिस्ट्स- AI सपोर्ट करेगा, लेकिन ह्यूमन टच जरूरी
  2. एजुकेशन: टीचर्स, इंस्ट्रक्टर्स- क्रिएटिव टीचिंग AI से नहीं हो सकती
  3. क्रिएटिव फील्ड्स: आर्टिस्ट्स, राइटर्स, जर्नलिस्ट्स- AI क्रिएटिविटी की नकल नहीं कर सकता
  4. ट्रेड्स: प्लंबर्स, इलेक्ट्रीशियंस, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स- फिजिकल वर्क AI नहीं कर सकता
  5. HR और मैनेजमेंट: ऑपरेशंस मैनेजर्स, जहां ह्यूमन जजमेंट जरूरी
  6. अन्य: एथलीट्स, बारटेंडर्स, सोशल वर्कर्स- AI का रिस्क 0%



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