दिल्ली परिवहन विभाग के नोटिस के मुताबिक अब आपकी गाड़ी सड़क पर चलती मिले या आपके घर के बाहर पार्किंग में खड़ी हो, नियम दोनों पर समान रूप से लागू होगा. जब्त की गई इन गाड़ियों को सीधे स्क्रैप यानी कबाड़ करने के लिए भेज दिया जाएगा. अक्सर लोगों के मन में भ्रम रहता है कि यह नियम केवल कारों के लिए है, लेकिन विभाग ने साफ कर दिया है कि यह आदेश दोपहिया स्कूटर, बाइक और चार पहिया कार, जीप, कमर्शियल वाहन सभी पर लागू होता है.
10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियां जब्त
यदि आपकी बाइक 15 साल से अधिक पुरानी है, तो वह भी इस कार्रवाई के दायरे में आएगी. परिवहन विभाग का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में जहरीले धुएं और प्रदूषण को कम करना है, जिसमें पुराने बीएस-3 और उससे कम मानक वाले इंजन सबसे ज्यादा योगदान दे रहे हैं.
पुरानी गाड़ियों को हटाने की यह प्रक्रिया अचानक शुरू नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा कानूनी सफर है:
- 2014-2015 (NGT का आदेश): नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पहली बार दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगाया था.
- 2018 (सुप्रीम कोर्ट की मुहर): सर्वोच्च न्यायालय ने एनजीटी के आदेश को बरकरार रखते हुए परिवहन विभाग को सख्त निर्देश दिए कि ऐसी गाड़ियों की लिस्ट सार्वजनिक की जाए और उन्हें हटाया जाए.
- 2021-22 (रजिस्ट्रेशन कैंसलेशन): दिल्ली सरकार ने बड़े पैमाने पर ऐसी गाड़ियों का पंजीकरण रद्द करना शुरू किया और ‘डी-रजिस्टर’ वाहनों की सूची जारी की.
- 2023-24 (स्क्रैप पॉलिसी का विस्तार): सरकार ने निजी वेंडरों के साथ मिलकर अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर बनाए और लोगों को खुद गाड़ी सरेंडर करने पर टैक्स में छूट का लालच दिया.
- 2026 (ताजा फरमान): अब विभाग ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए सीधे जब्ती और स्क्रैपिंग का रास्ता चुना है, जिसमें किसी भी प्रकार का नोटिस नहीं दिया जाएगा.
एनओसी और ट्रांसफर कैसे करें?
अगर आपकी गाड़ी की उम्र पूरी होने वाली है, तो विभाग ने एक छोटा सा रास्ता खुला रखा है. आप समय रहते अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेकर अपनी गाड़ी को दिल्ली-एनसीआर से बाहर के राज्यों में स्थानांतरित कर सकते हैं. लेकिन याद रहे, एक बार गाड़ी जब्त हो गई, तो उसे वापस पाने या एनओसी लेने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचेगा.
परिवहन विभाग के 2025 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में लगभग 62 लाख ऐसे पंजीकृत वाहन थे, जिनमें 41 लाख टू-व्हीलर्स और 18 लाख चारपहिया वाहन शामिल थे. लेकिन वास्तविक संख्या इससे एक-चौथाई से भी कम है, क्योंकि कई वाहन पहले ही डी-रजिस्टर्ड हो चुके हैं या एनसीआर से बाहर ले जाए गए हैं. अब मौजूदा हालात में दोपहिया वाहनों की संख्या 2-3 लाख के आसपास हो सकती है.
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