सोशल मीडिया पर एआई पोस्ट की फाउंडर पूनम सोनी ने इसे लेकर चिंता जताई. उन्होंने लिखा कि अब एक साधारण सेल्फी भी आपका घर या सटीक लोकेशन रिवील कर सकती है, और ज्यादातर लोगों को तो पता भी नहीं कि ऐसी तकनीक मौजूद है.
आखिर GeoSpy AI करता क्या है?
जियोस्पाई AI एक इमेज एनालिसिस टूल है, जिसे खास तौर पर सरकारी एजेंसियों और कानून लागू करने वाली संस्थाओं के लिए बनाया गया है. कंपनी का कहना है कि यह जांच में मदद करने के लिए फोटो को ‘इंटेलिजेंस’ में बदल देता है- यानी तस्वीर से ही जरूरी सुराग निकाल लेता है.
यह टूल 2023 में लॉन्च हुआ था. यह फोटो में दिख रही इमारतों की बनावट, सड़क का पैटर्न, पेड़-पौधे, जमीन का रंग, आसपास का माहौल जैसे विजुअल संकेतों को पढ़कर अंदाजा लगाता है कि तस्वीर कहां ली गई होगी.
इसकी खास बातें क्या हैं?
जियोस्पाई एआई दुनिया भर में लोकेशन का अनुमान लगाने का दावा करता है. कुछ मामलों में यह 1 से 50 किलोमीटर के दायरे में जगह बता सकता है, जबकि सपोर्टेड शहरों में मीटर-लेवल तक की सटीकता की बात कही जाती है. इसमें ‘स्ट्रीट सर्च’ और ‘प्रॉपर्टी सर्च’ जैसे फीचर भी बताए जाते हैं, जिनसे लाखों प्रॉपर्टी रिकॉर्ड तक पहुंच संभव है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की कुछ पुलिस एजेंसियां जैसे मियामी-डेड शेरिफ ऑफिस और लॉस एंजेलिस पुलिस डिपार्टमेंट इसे अपनी जांच में इस्तेमाल कर रही हैं.
चिंता क्यों बढ़ रही है?
जहां यह तकनीक अपराध सुलझाने में मददगार हो सकती है, वहीं आम लोगों की प्राइवेसी को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे AI बेस्ड इमेज पहचान तकनीक तेज और स्मार्ट होती जाएगी, वैसे-वैसे सोशल मीडिया पर शेयर की गई सामान्य तस्वीरें भी जरूरत से ज्यादा जानकारी उजागर कर सकती हैं. सीधी बात यह है कि अब फोटो सिर्फ फोटो नहीं रही-वह आपके बारे में बहुत कुछ बता सकती है.
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
