19 जुलाई 2026 का पंचांग: रविवार को रखा जाएगा स्कंद षष्ठी का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

19  जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और रविवार का दिन है। षष्ठी तिथि रविवार को देर रात 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। 19  जुलाई को  शाम 7 बजकर 23 मिनट तक परिघ योग रहेगा। साथ ही रविवार को शाम 6 बजकर 12 मिनट तक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 19  जुलाई को स्कंद षष्ठी का व्रत किया जायेगा। आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते रविवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

19  जुलाई 2026 का पंचांग

  • आषाढ़ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि- 19 जुलाई 2026 को देर रात 3 बजकर 30 मिनट तक
  • परिघ योग- 19 जुलाई 2026 को शाम 7 बजकर 23 मिनट तक
  • उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र- 19 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट तक
  • 16 जुलाई 2026 विशेष- स्कंद षष्ठी व्रत

19 जुलाई 2026 का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:44 ए एम से 05:27 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:18 पी एम से 01:11 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:56 पी एम से 03:49 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:18 पी एम से 07:39 पी एम
  • अमृत काल- 10:56 ए एम से 12:33 पी एम
  • सर्वार्थ सिद्धि योग – पूरे दिन
  • रवि योग- 06:11 ए एम से 06:12 पी एम

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- शाम 05:36 से शाम 07:19 तक
  • मुंबई- शाम 05:40 से शाम 07:18 तक
  • चंडीगढ़- शाम 05:41 से शाम 07:25 तक
  • लखनऊ- शाम 05:19 से शाम 07:01 तक
  • भोपाल- शाम 05:27 से शाम 07:08 तक
  • कोलकाता- शाम 04:43 से शाम 06:23 तक
  • अहमदाबाद- शाम 05:46 से शाम 07:26 तक
  • चेन्नई- शाम 05:03 से शाम 06:39 तक

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय- सुबह 5: 33 बजे
  • सूर्यास्त- शाम 7: 18 बजे

स्कंद षष्ठी व्रत महत्व

स्कंद षष्ठी को कुमार षष्ठी और संतान षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। स्कंद षष्ठी के अवसर पर मंदिरों में शिव-पार्वती की विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि यह व्रत विधिपूर्वक करने से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है और यदि पहले से संतान है और संतान को किसी प्रकार की समस्या है तो यह व्रत संतान को समस्याओं से बचाने में सहायता करता है। साथ ही कहते हैं कि स्कंद माता कुमार कार्तिकेय के पूजन से जितनी प्रसन्न होती हैं, उतनी वे स्वयं के पूजन से भी नहीं होती हैं। मयूर पर आसीन देव सेनापति कुमार कार्तिकेय की आराधना दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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