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Sachin Tendulkar Guru Purnima post touches hearts: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सचिन तेंदुलकर ने अपने बचपन के कोच स्वर्गीय रमाकांत आचरेकर को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया. उन्होंने लिखा कि जिस इंसान ने उन्हें क्रिकेटर और बेहतर इंसान बनाया, उन्हें ‘एक और धन्यवाद’ कहना हमेशा बाकी लगता है. आचरेकर सर के जाने के बाद भी सचिन ने हर साल आशीर्वाद लेने की अपनी परंपरा को कायम रखा है. 13 सिक्कों के अनुशासन से शुरू हुआ यह सफर 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों तक पहुंचा. गुरु-शिष्य की यह मिसाल आज भी हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणादायी है.
सचिन ने गुरु पूर्णिमा के मौके पर अपने गुरु रमाकांत आचरेकर को किया याद.
नई दिल्ली. गुरु पूर्णिमा का पावन अवसर और अपने गुरु के प्रति असीम कृतज्ञता का भाव ये दोनों ही भारतीय संस्कृति और खेल जगत की सबसे खूबसूरत जोड़ियों में से एक, सचिन तेंदुलकर और रमाकांत आचरेकर सर के रिश्ते को परिभाषित करते हैं. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने इस साल गुरु पूर्णिमा पर अपने बचपन के कोच और मार्गदर्शक स्वर्गीय रमाकांत आचरेकर को याद करते हुए एक अत्यंत भावुक संदेश साझा किया. तेंदुलकर ने कहा कि जिस व्यक्ति ने उन्हें एक महान क्रिकेटर और एक परिपक्व इंसान के रूप में तराशा, उन्हें चाहे जितने भी धन्यवाद दिए जाएं, हमेशा लगता है कि ‘एक और शुक्रिया’ कहना अभी बाकी ही रह गया है.
जब आचरेकर सर जीवित थे, तब सचिन (Sachin Tendulkar) के लिए गुरु पूर्णिमा का दिन केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक अनुष्ठान जैसा था. हर साल इस दिन सचिन बिना चुके अपने गुरु के घर जाकर उनके चरणों में शीश नवाते थे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते थे. आचरेकर सर के जाने के बाद भी सचिन ने इस पवित्र परंपरा को टूटने नहीं दिया है. आज के डिजिटल युग में, जब शब्द अक्सर औपचारिक हो जाते हैं, सचिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक दिल को छू लेने वाली पोस्ट लिखकर अपने गुरु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
Standing here today, I realised something. No matter how many years pass, I’ll always feel like I have one more ‘thank you’ left to say.
Thank you for believing in me, guiding me, and helping me become the person I am.
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