सावन महीना भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस साल ये पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस पूरे महीने भक्त भगवान शिव की विधि विधान पूजा करते हैं। साथ ही उनके मंत्रों और चालीसा का पाठ करते हैं और व्रत भी रखते हैं। इस महीने में वैसे तो कई व्रत-त्योहार पड़ते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा महत्व सावन सोमवार व्रत का माना जाता है। कहते हैं ये पवित्र महीना भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे खास समय होता है। अगर आप भी भगवान शिव की असीम कृपा पाना चाहते हैं तो सावन में शिव की यह दिव्य आरती जरूर करें। कहते हैं इस आरती को करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यहां देखें ओम जय शिव ओंकारा आरती के लिरिक्स।
शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्ध-जीवन धारा।
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
वे त्रिगुण रूप में प्रकट होते हैं और तीनों लोकों के लोगों को मोहित करते हैं।
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनक, गरुड़, भूत और अन्य।
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव बिना भेदभाव के जानते हैं।
ये तीनों एक हैं, ओंकार में सुशोभित हैं।
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
जय शिव ओंकारा…॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्ध-जीवन धारा।
यह भी पढ़ें:
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
