34 साल पहले लॉन्च हुई इस एसयूवी ने मचा दिया था बवाल, फिर करनी पड़ी बंद, ये थी वजह
भारतीयों के लिए नया डिजाइन
टाटा सिएरा का डिजाइन भारतीयों के लिए नया था. इसका यूनिक डिजाइन तीन दरवाजों वाला था, जिसमें पीछे की बड़ी खिड़कियां छत की ओर मुड़ी हुई थीं. 1991 में सिएरा सबसे बोल्ड दिखने वाली गाड़ियों में से एक थी. टाटा सिएरा का लैडर-ऑन-फ्रेम चेसिस टेल्कोलाइन पिकअप ट्रक से लिया गया था, जिससे इसका साइज बड़ा हो गया था.
इंडिया की पहली प्रीमियम एसयूवी
टाटा सिएरा भारतीय बाजार की पहली प्रीमियम एसयूवी थी. सिएरा ने कई ऐसे फीचर्स पेश किए, जो न सिर्फ इस सेगमेंट में बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में पहली बार देखे गए थे. सिएरा के इंटीरियर्स में पावर विंडो, पावर स्टीयरिंग, स्टीयरिंग के लिए टिल्ट एडजस्टमेंट, सेंट्रल एयर कंडीशनिंग और सेंट्रल लॉकिंग जैसे फीचर्स थे. साथ ही, बड़ी रियर विंडो और विंटेज सोफा जैसी रियर सीट ने पीछे बैठने वालों को बेहतरीन अनुभव दिया. सिएरा में दो रियर विंडशील्ड वाइपर आते थे, जो आज की कई गाड़ियों में भी नहीं मिलते; बड़ी रियर विंडशील्ड को देखते हुए यह जरूरी था.
डीजल इंजन से लैस
जहां 1991 में बाकी बड़ी कंपनियां सिर्फ पेट्रोल इंजन वाली पैसेंजर गाड़ियां बेच रही थीं, वहीं सिएरा डीजल इंजन के साथ आई थी. टाटा ने सिएरा को 2 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड डीजल इंजन के साथ लॉन्च किया था, जो 63 एचपी पावर और 120 एनएम टॉर्क देता था. सिएरा में रियर व्हील ड्राइव स्टैंडर्ड था और 4×4 ऑप्शनल था. 90 के दशक में डीजल इंजन के साथ 4×4 पावरट्रेन लेआउट एक क्रांतिकारी फीचर था. टाटा ने सिएरा में यूनिक डॉग-लेग 5-स्पीड गियरबॉक्स दिया था, जिसमें पारंपरिक H-पैटर्न की जगह पहली गियर लोअर-लेफ्ट में लगती थी.
1997 में लॉन्च हुआ टर्बोचार्ज्ड इंजन
बाद में 1997 में, टाटा ने सिएरा का टर्बोचार्ज्ड वर्जन लॉन्च किया, जो 89 एचपी पावर और 190 एनएम टॉर्क देता था. इस वर्जन के साथ H-पैटर्न गियरबॉक्स आया, जिससे सिएरा की ड्राइविंग का अनुभव और बेहतर हो गया. 1991 में टाटा सिएरा का तीन दरवाजों वाला डिजाइन भारतीय परिवारों के लिए ज्यादा यूजफुल नहीं था. इसके अलावा, इसकी शुरुआती कीमत 5 लाख (ऑन-रोड मुंबई) थी, जो 90 के दशक के आखिर में 8 लाख (ऑन-रोड मुंबई) तक पहुंच गई. टाटा सिएरा को अपने शुरुआती सालों में मारुति की पॉपुलर गाड़ियों जैसे मारुति 800, ओमनी और जिप्सी से मुकाबला करना पड़ा. मारुति की गाड़ियां सस्ती थीं और भारतीय बजट के हिसाब से ज्यादा प्रैक्टिकल लगती थीं. बाद में महिंद्रा ने भी आर्माडा लॉन्च की, जिसमें सिएरा जैसा इंजन था लेकिन कीमत कम थी. 2002 में महिंद्रा स्कॉर्पियो ने सिएरा को कड़ी टक्कर दी.
2003 में करनी पड़ी बंद
टाटा सिएरा 1991 से 2003 तक बाजार में रही; 1991 में सिर्फ 667 यूनिट्स बिकीं और 1994-95 में बिक्री 3,910 यूनिट्स तक पहुंची. इसके बाद बिक्री में गिरावट आई. कम बिक्री के चलते टाटा ने अपना फोकस दूसरी गाड़ियों पर शिफ्ट कर दिया. यही वजह रही कि यह क्रांतिकारी भारतीय एसयूवी लोगों की नजरों से ओझल रह गई.
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