इंडिया में लॉन्च होने से पहले विदेशों में बैन हो गई टोयोटा की ‘मिनी फॉर्च्युनर’, ये है वजह
अमेरिका में बैन
लेकिन सिर्फ इसलिए कि हर कोई इसे करीब से देखना चाहता है, इसका मतलब यह नहीं कि हर कोई इसे खरीद भी पाएगा. यह कॉम्पैक्ट ऑफ-रोडर पहले ही अमेरिका और यूरोप के लिए उपलब्ध नहीं है, और अब ऑस्ट्रेलिया – जो टोयोटा के लिए मजबूत गाड़ियों का बड़ा बाजार है – को भी लैंड क्रूज़र FJ की ‘नो-फ्लाई’ लिस्ट में डाल दिया गया है.
ऑस्ट्रेलिया ने बंद किया दरवाजा
CarExpert के मुताबिक, टोयोटा ऑस्ट्रेलिया का फिलहाल लैंड क्रूज़र FJ को उसकी मौजूदा फॉर्म में पेश करने का कोई प्लान नहीं है. ब्रांड के सेल्स, मार्केटिंग और फ्रेंचाइज़ ऑपरेशंस चीफ सीन हैंली ने कहा कि मामला कीमत या पोजिशनिंग का नहीं, बल्कि एमिशन कंप्लायंस का है. FJ में इस्तेमाल किया गया 2.7-लीटर पेट्रोल इंजन ऑस्ट्रेलिया के यूरो 6 एमिशन नियमों पर खरा नहीं उतरता. हैंली ने साफ कहा कि यह गाड़ी मुख्य रूप से एशियाई बाजारों के लिए बनाई गई थी, जहां नियम थोड़े कम सख्त हैं. इसी वजह से उन्होंने कहा कि मौजूदा स्पेसिफिकेशन में FJ ऑस्ट्रेलिया के लिए ‘नो-गो जोन’ है.
इंजन
पुराना इंजन, नए नियम लैंड क्रूज़र FJ की सीमित उपलब्धता की वजह है इसका 2TR-FE 2.7-लीटर पेट्रोल इंजन. यह फोर-सिलेंडर इंजन टोयोटा के कई मॉडल्स जैसे Hilux Surf, Tacoma, Innova, Fortuner, Hiace और Prado की कई जनरेशन में इस्तेमाल हुआ है. लेकिन अब समय बदल गया है. इनमें से कुछ मॉडल्स अब बंद हो चुके हैं और यह इंजन भी अब उन सख्त एमिशन स्टैंडर्ड्स के हिसाब से नहीं बना है, जो अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जरूरी हैं. यही वजह है कि FJ इन बाजारों से बाहर है.
बदल सकते हैं हालात
फिर भी उम्मीद है कि अगर टोयोटा FJ को नया, क्लीनर इंजन दे दे तो हालात बदल सकते हैं. हैंली के मुताबिक, यूरो 6 कंप्लायंट पावरट्रेन आने पर उन बाजारों के लिए रास्ता खुल सकता है, जिन्होंने अभी इसे बाहर रखा है. फिलहाल, लैंड क्रूज़र FJ उन देशों की सीमाओं के बाहर ही रहेगी, जहां एमिशन के नियम ज्यादा सख्त हैं.
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