दिल्ली में वाहन बिक्री का टूटा रिकॉर्ड! 2025 में बिक गई 8.2 लाख गाड़ियां


Vehicle Sales 2025 In Delhi : साल 2025 दिल्ली के लिए गाड़ियों की बिक्री के लिहाज से ऐतिहासिक रहा है. पूरे साल में शहर में इस बार रिकॉर्डतोड़ बिक्री हुई है. दिल्ली में 8,16,051 नए वाहन रजिस्टर हुए है. लेकिन इस रिकॉर्ड के साथ एक बड़ी चेतावनी भी जुड़ी है. यह बढ़ोतरी पब्लिक या साझा परिवहन की वजह से नहीं, बल्कि निजी वाहनों के चलते हुई है, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या और गंभीर होने की आशंका बढ़ गई है.

आंकड़ों के मुताबिक, इन 8.16 लाख नए रजिस्ट्रेशन में से करीब 7.2 लाख वाहन निजी उपयोग के हैं. यानी ज्यादातर लोगों ने बस, मेट्रो या साझा साधनों के बजाय अपनी निजी गाड़ी खरीदना बेहतर समझा. इनमें से करीब 75 फीसदी वाहन पेट्रोल से चलने वाले हैं. इसमें लगभग 3.89 लाख सिर्फ पेट्रोल और 1.99 लाख पेट्रोल-इथेनॉल वाले वाहन शामिल हैं.

डीजल वाहनों की संख्या घटी

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल काउंसिल फॉर क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के इंडिया मैनेजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट का कहना है कि डीजल वाहनों की संख्या जरूर घटी है, लेकिन पेट्रोल पर निर्भरता अभी भी बहुत ज्यादा है. उन्होंने कहा, “पेट्रोल वाहनों की इतनी ज्यादा हिस्सेदारी बताती है कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को लेकर नीति को और मजबूत करने की जरूरत है. निजी पेट्रोल वाहनों की बढ़ती संख्या से दिल्ली में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या कम होने के बजाय और बढ़ेगी.”

भट्ट के मुताबिक, ज्यादा वाहन चाहे किसी भी ईंधन से चलें, सड़क पर भीड़ तो बढ़ेगी ही. लेकिन इंटरनल कंबशन इंजन यानी पेट्रोल-डीजल वाहन हवा की गुणवत्ता पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं. इससे साफ है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट अभी इतना भरोसेमंद और सुविधाजनक नहीं बन पाया है कि लोग निजी वाहन छोड़ सकें.

EV वाहनों पर फोकस बढ़ा

एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट के फैकल्टी अनिल चिखारा ने कहा कि सरकार द्वारा इथेनॉल ब्लेंडिंग अनिवार्य करने के बाद ज्यादातर नए पेट्रोल वाहन अपने आप इथेनॉल के अनुकूल हो गए हैं. ऐसे में पेट्रोल और पेट्रोल-इथेनॉल वाहनों को अलग-अलग नहीं देखना चाहिए. उन्होंने साफ कहा, “लोग कोई अलग फैसला नहीं कर रहे, वे सिर्फ नियमों का पालन कर रहे हैं. अब जरूरत है कि EV पॉलिसी को और जोरदार तरीके से आगे बढ़ाया जाए.”

हालांकि, इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनकी हिस्सेदारी अभी भी पेट्रोल वाहनों के मुकाबले काफी कम है. महीने के हिसाब से देखें तो जनवरी से सितंबर तक बिक्री 50,000 से 70,000 के बीच स्थिर रही. लेकिन अक्टूबर में यह आंकड़ा 1.14 लाख तक पहुंच गया, जबकि नवंबर में 88,804 वाहन बिके. अधिकारियों के मुताबिक, त्योहारों का सीजन, साल के अंत की छूट, नए मॉडल लॉन्च, GST में राहत और आसान फाइनेंसिंग इसकी बड़ी वजह रहे. सिर्फ अक्टूबर-नवंबर में ही साल की कुल बिक्री का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा दर्ज हुआ.

SUV की हुई इतनी सेल

दिल्ली में सबसे ज्यादा बिकने वाले वाहन मोटरसाइकिल और स्कूटर रहे. करीब 5.31 लाख दोपहिया वाहन बिके, जो कुल बिक्री का लगभग दो-तिहाई है. इसके बाद कार और SUV जैसी चार पहिया गाड़ियों की संख्या 1.9 लाख रही. यह मिडिल क्लास की बढ़ती आमदनी और बदलती आकांक्षाओं को दिखाता है. वहीं, इलेक्ट्रिक रिक्शा (44,362) और माल ढोने वाले वाहनों की संख्या भी अच्छी रही, जिससे लास्ट-माइल डिलीवरी और शहरी लॉजिस्टिक्स के बढ़ने का संकेत मिलता है. इसके उलट बसों (2,810) और मैक्सी कैब्स (174) की बिक्री बेहद कम रही.

इकोनॉमिस्ट के अनुसार, बढ़ती खरीद कैपेसिटी, आसान ऑटो लोन और डिस्काउंट ने 2025 में बिक्री को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाया है. इसके अलावा कोविड के बाद लोगों में साझा परिवहन को लेकर झिझक भी बनी रही, जिससे निजी वाहन खरीदने का चलन बढ़ा. 2025 में दिल्ली की गाड़ियों की बंपर बिक्री आर्थिक भरोसे को तो दिखाती है, लेकिन साथ ही यह भी साफ करती है कि अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साफ-सुथरी मोबिलिटी और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो शहर को इसकी बड़ी पर्यावरणीय कीमत चुकानी पड़ सकती है.



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