Tata Motors Q1 results: लगातार तीसरी बार धड़ाम हुआ मुनाफा, अब क्या करें निवेशक
टाटा मोटर्स ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 3,924 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 30 फीसदी कम है. इसके बावजूद कंपनी को आगामी महीनों में रिकवरी की उम्मीद है.
टाटा मोटर्स को तगड़ा झटका लगा और मुनाफा 30 फीसदी गिरा है.(Image:AI)नई दिल्ली. टाटा मोटर्स ने 8 अगस्त को अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY26) के नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी का शुद्ध मुनाफा 30 फीसदी घटकर 3,924 करोड़ रुपये रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में यह मुनाफा 5,643 करोड़ रुपये था. हालांकि यह गिरावट बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रही, लेकिन निवेशकों को थोड़ी निराशा जरूर हुई. कंपनी की कुल आय भी इस बार कुछ कमजोर रही. Q1 FY26 में कंपनी की कुल कमाई 2.5 फीसदी घटकर 1.04 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल इसी अवधि में 1.07 लाख करोड़ रुपये थी. हालांकि यह आंकड़ा विश्लेषकों के अनुमान से बेहतर रहा, जिन्होंने 8.7 फीसदी गिरावट की उम्मीद की थी. टाटा मोटर्स की कमाई से पहले की आय (EBITDA) में 36 फीसदी की गिरावट आई है और यह घटकर 9,700 करोड़ रुपये रह गई. इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह जगुआर लैंडरोवर (Jaguar Land Rover-JLR) के प्रदर्शन में गिरावट रही है.
अमेरिकी टैरिफ का असर:
JLR की आय 9 फीसदी घटकर 6.6 अरब पाउंड पर पहुंच गई. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क ने कंपनी के लग्जरी सेगमेंट को बड़ा नुकसान पहुंचाया. EBIT मार्जिन भी 490 बेसिस पॉइंट गिरकर सिर्फ 4 फीसदी रह गया. टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट की आय 4.7 फीसदी घटी, लेकिन EBITDA मार्जिन 12.2 फीसदी तक बेहतर हुए, जो लागत में कटौती और बेहतर प्राइसिंग की वजह से संभव हुआ. पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में भी 8.2 फीसदी की गिरावट देखी गई.
डिमर्जर अपडेट
कंपनी ने बताया कि PV और CV यूनिट्स के डिमर्जर की अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी है और NCLT का फैसला जल्द आने की उम्मीद है. डिमर्जर 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होने की संभावना है.
कंपनी का नजरिया
कंपनी का कहना है कि डिमांड की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, लेकिन ब्रांड वैल्यू और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के जरिए मार्जिन सुधारने की कोशिश जारी रहेगी.
शेयर बाजार पर असर
नतीजों के बाद 8 अगस्त को कंपनी के शेयर 2.4 फीसदी गिरकर 630.80 रुपये पर बंद हुए. साल 2025 में अब तक स्टॉक करीब 16 फीसदी टूट चुका है. अब निवेशकों के सामने एक नई चुनौती है कि वो ऐसे हालात में क्या करें.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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