भारत के हायर एजुकेशन में ‘महासंकट’, 75% कॉलेज अपने छात्रों को नहीं दे पा रहे जॉब वाली स्किल्स; रिपोर्ट में खुलासा
भारत में हर साल लाखों छात्र डिग्री लेकर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से निकलते हैं. उम्मीद होती है कि पढ़ाई पूरी करते ही उन्हें अच्छी नौकरी मिलेगी और वे अपने करियर की मजबूत शुरुआत कर पाएंगे. हालांकि, हकीकत इससे अलग नजर आती है. हाल ही में टीमलीज एडटेक की एक नई रिपोर्ट ने भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था की इस सच्चाई को सामने रखा है, जिसने शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
डिग्री तो मिल रही है, लेकिन नौकरी नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के करीब 75 प्रतिशत उच्च शिक्षा संस्थान (कॉलेज और विश्वविद्यालय) अपने छात्रों को उद्योग-अनुकूल यानी जॉब-रेडी स्किल्स देने में असफल हो रहे हैं. इसका मतलब यह है कि छात्र डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन उनमें वह व्यावहारिक कौशल नहीं होता, जिसकी आज के नियोक्ताओं को जरूरत है. इस रिपोर्ट का शीर्षक डिग्री फैक्ट्रियों से रोजगार केंद्रों तक है, जो अपने आप में यह संकेत देता है कि कई संस्थान सिर्फ डिग्री बांटने का काम कर रहे हैं, न कि छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करने का है.
रोजगार दिलाने में संस्थानों की कमजोर भूमिका
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति कितनी चिंताजनक है. सिर्फ 16.67 प्रतिशत संस्थान ही ऐसे हैं, जो अपने 76 से 100 प्रतिशत छात्रों को स्नातक होने के छह महीने के भीतर नौकरी दिला पाते हैं. यह आंकड़ा उन संस्थानों के लिए भी निराशाजनक है, जो खुद को बेहतर प्लेसमेंट देने वाला बताते हैं.
इंडस्ट्री और पढ़ाई के बीच बड़ा गैप
आज के समय में शिक्षा का उद्योग से जुड़ा होना बहुत जरूरी है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि ऐसा बहुत कम जगहों पर हो रहा है. सिर्फ 8.6 प्रतिशत संस्थानों ने माना कि उनके पाठ्यक्रम पूरी तरह से उद्योग की जरूरतों के अनुरूप हैं. वहीं, 51 प्रतिशत से ज्यादा संस्थानों ने साफ कहा कि उनके कोर्स का उद्योग से कोई तालमेल ही नहीं है. टीमलीज एडटेक के संस्थापक और सीईओ शांतनु रूज के मुताबिक, यह स्थिति आकांक्षाओं और जमीनी हकीकत के बीच गहरे अंतर को दिखाती है. उन्होंने यहां तक कहा कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली अपने तय किए गए लक्ष्यों को हासिल करने में संरचनात्मक रूप से कमजोर है.
कक्षाओं में इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की कमी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कॉलेजों में इंडस्ट्री से जुड़े अनुभवी प्रोफेशनल्स की भागीदारी बहुत कम है. सिर्फ 7.56 प्रतिशत संस्थानों ने ही कई कोर्सों में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस को शामिल किया है. इसका असर यह होता है कि ज्यादातर छात्रों को असली दुनिया की नौकरी, बदलती भूमिकाओं और काम करने के तरीकों की सही समझ नहीं मिल पाती है. आज के समय में कंपनियां सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि मान्यता प्राप्त इंडस्ट्री सर्टिफिकेट्स को भी महत्व देती हैं. लेकिन रिपोर्ट बताती है कि 60 प्रतिशत से ज्यादा संस्थानों ने अपने पाठ्यक्रम में ऐसे सर्टिफिकेट्स को शामिल करने पर कभी विचार ही नहीं किया. इससे छात्र ऐसे कौशल के बिना ग्रेजुएट हो जाते हैं, जिन्हें नियोक्ता तुरंत पहचान सकें और महत्व दें.
इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल अनुभव की भारी कमी
नौकरी के लिए तैयार होने में इंटर्नशिप और अनुभवात्मक सीख की भूमिका बहुत अहम होती है. लेकिन यहां भी हालात कमजोर हैं. सिर्फ 9.4 प्रतिशत संस्थानों में सभी कोर्सों के लिए अनिवार्य इंटर्नशिप होती है. वहीं, 37.8 प्रतिशत संस्थानों में इंटर्नशिप की कोई व्यवस्था ही नहीं है. इसके अलावा, लाइव इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स, जिनमें छात्र असली समस्याओं पर काम करते हैं, सिर्फ 9.68 प्रतिशत संस्थानों में ही कराए जाते हैं. इन कमियों की वजह से बड़ी संख्या में छात्र बिना किसी व्यावहारिक अनुभव के नौकरी बाजार में कदम रखते हैं. ऐसे में क्लासरूम से वर्कप्लेस तक का सफर उनके लिए बेहद कठिन हो जाता है.
पूर्व छात्रों (Alumni) का नेटवर्क भी कमजोर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कॉलेज अपने पूर्व छात्रों के नेटवर्क का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, जबकि यह उद्योग और संस्थानों के बीच एक मजबूत कड़ी हो सकता है. सिर्फ 5.44 प्रतिशत संस्थानों ने ही बताया कि उनके पास सक्रिय एलुमनाई नेटवर्क है. इससे मेंटरशिप, रेफरल और अनौपचारिक भर्ती के मौके काफी सीमित रह जाते हैं.
रिपोर्ट की सिफारिशें
रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि उद्योग के अनुरूप पाठ्यक्रम, जरूरी इंटर्नशिप और नियोक्ताओं के साथ औपचारिक साझेदारी इन सभी को वैकल्पिक नहीं, बल्कि जरूरी शर्त माना जाना चाहिए. रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर समय रहते बदलाव नहीं किए गए, तो भारत में एक ऐसा संकट खड़ा हो सकता है, जहां डिग्रियों की संख्या तो बहुत होगी, लेकिन रोजगार के अवसर कम होंगे. यह असंतुलन न सिर्फ छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालेगा.
यह भी पढ़ें : कितने पढ़े-लिखे हैं 27 गेंदों में शतक लगाने वाले साहिल चौहान, भारत में कहां से है इनका ताल्लुक?
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
