Video: हाई बेस से थर्रा उठी दुकान, नीचे गिरने लगी दवाईयां… DJ वाले से हाथ जोड़ता दिखा दुकानदार
Viral Video: सोशल मीडिया पर रोजाना न जाने कितने वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन कुछ वीडियो ऐसे होते हैं जो मनोरंजन से ज्यादा गुस्सा और बेचैनी पैदा कर देते हैं. इन दिनों ऐसा ही एक वीडियो इंटरनेट पर चर्चा में है, जिसमें एक दुकानदार तेज बेस वाले डीजे संगीत से बुरी तरह परेशान नजर आ रहा है.
हालात इतने खराब थे कि दुकानदार हाथ जोड़कर डीजे वालों से आवाज कम करने की गुहार लगाता है. उसकी हालत यह बताने के लिए काफी है कि यह सिर्फ शोर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर इंसानों की सेहत पर हमला है.
वीडियो के कैप्शन में लिखा था कि तेज आवाज का असर सिर्फ कानों तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि यह हृदय रोगियों, उच्च रक्तचाप के मरीजों, बुजुर्गों और शिशुओं के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अत्यधिक ध्वनि से रक्तचाप अचानक बढ़ सकता है, दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, घबराहट के दौरे पड़ सकते हैं और सुनने की क्षमता स्थायी रूप से कम हो सकती है. इसके बावजूद शादियों, राजनीतिक रैलियों और धार्मिक जुलूसों में तेज डीजे अब आम बात बन चुकी है.
A shopkeeper literally begs to lower the volume of DJ Music sets,Because high bass DJ music is shaking his shop apart.
Walls crack. Glass rattles. Ears ring, For heart patients, BP patients, elderly, infants this isn’t fun, it’s a health emergency.
It is now normal in every… pic.twitter.com/FJrZyKr1CF
— Woke Eminent (@WokePandemic) January 26, 2026
शोर बना सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल
तेज बेस वाला संगीत अब केवल मनोरंजन नहीं रहा, बल्कि यह एक तरह का सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है. कई शहरों और कस्बों में देर रात तक बजने वाला डीजे लोगों की नींद, मानसिक शांति और सेहत पर सीधा असर डाल रहा है. शोर नियंत्रण कानून मौजूद होने के बावजूद जमीनी स्तर पर उनका पालन मुश्किल से ही होता है.
तेज शोर से स्थायी नुकसान
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं. एक यूजर ने लिखा, “यह सनातन धर्म को बचाने के लिए है सर. ऐसे लाउडस्पीकर धर्म को बचाते हैं. क्या सर, आपको साधारण बातें भी समझ नहीं आतीं?” एक दूसरे यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “झांसी में एक शादी के लिए गया था. मैंने डीजे जुलूस में जाने से परहेज किया, क्योंकि शोर असहनीय था. तेज़ आवाज़ कानों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है, समझ नहीं आता कि पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं करती.”
एक अन्य यूजर ने लिखा, “कल गणतंत्र दिवस के लिए राजनेताओं ने जुलूस निकाला. इतना तेज़ संगीत था कि मेरी बुज़ुर्ग माँ को घबराहट का दौरा पड़ गया. घर के सारे शीशे कांप रहे थे. संगीत जितना तेज़, देशभक्ति उतनी ज़्यादा?”
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