Arsink मैलवेयर: Google की चेतावनी और एंड्रॉयड सुरक्षा सुझाव
मोबाइल सिक्योरिटी कंपनी Zimperium की रिपोर्ट के अनुसार, Arsink malware कई अलग-अलग वेरिएंट्स में फैल रहा है, जिससे इसे पहचानना और रोकना मुश्किल हो जाता है. ये मालवेयर अक्सर उन ऐप्स के ज़रिए फोन में पहुंचता है जो देखने में बिल्कुल असली और भरोसेमंद लगते हैं.
कैसे फैलता है Arsink Malware?
रिसर्चर्स के मुताबिक, Arsink ज्यादातर Google Play Store के बाहर से फैलाया जा रहा है. ये Telegram चैनल्स, Discord पोस्ट्स, थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स और संदिग्ध डाउनलोड लिंक के ज़रिए यूज़र्स तक पहुंचता है. इन ऐप्स को अक्सर ‘Mod App’ या ‘Premium Version’ जैसे नाम दिए जाते हैं, ताकि लोग इन्हें असली ऐप का अपग्रेड समझकर डाउनलोड कर लें.
ये फेक ऐप्स WhatsApp, Instagram, YouTube, Spotify, Facebook और TikTok जैसे पॉपुलर प्लेटफॉर्म्स के नाम पर बनाए जाते हैं. इंस्टॉल होने के बाद यह malware मैसेज पढ़ सकता है, कॉल लॉग एक्सेस कर सकता है, कॉन्टैक्ट्स चुरा सकता है, माइक्रोफोन से ऑडियो रिकॉर्ड कर सकता है और फोन में मौजूद फाइल्स तक पहुंच बना सकता है.
Google ने क्या कहा?
गूगल ने साफ किया है कि Arsink malware के वर्ज़न प्ले स्टोर पर मौजूद नहीं हैं. जिन Android डिवाइसेज़ में गूगल प्ले प्रोटेक्ट ऑन है, उन्हें इस तरह के खतरनाक ऐप्स से अपने-आप सुरक्षा मिलती है. इसके अलावा, गूगल ने रिसर्चर्स के साथ मिलकर इस malware से जुड़े कुछ सर्वर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बंद किया है.
कैसे रहें सुरक्षित?
यूज़र्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी ऐप को सिर्फ प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करें, अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ‘Mod’ या ‘Premium’ ऐप्स से दूरी बनाए रखें. अगर कोई ऐप ज़रूरत से ज़्यादा परमिशन मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं.
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