देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए इस बार ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का एक अनोखा अवतार देखने को मिल रहा है. दिल्ली पुलिस के बेड़े में एक ऐसा ‘जादुई’ काला चश्मा शामिल हुआ है, जो महज धूप से बचने का साधन नहीं, बल्कि आतंकियों और खूंखार अपराधियों के लिए काल साबित होगा. पहली बार इस्तेमाल हो रहे इस एआई चश्मे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सामने से गुजरने वाले हर शख्स की पहचान पलक झपकते ही कर लेता है.

बुधवार को दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर पुलिस अधिकारी इन चश्मों को पहनकर गश्त करते और इनका ट्रायल करते नजर आए. सुरक्षा एजेंसियों ने गणतंत्र दिवस पर मंडरा रहे संभावित आतंकी खतरों को देखते हुए सुरक्षा घेरे में कई बड़े बदलाव किए हैं, जिसमें यह एआई चश्मा सबसे अहम है. कर्तव्य पथ पर तैनात पुलिसकर्मी जब यह चश्मा पहनकर भीड़ पर नजर डालेंगे, तो उनकी आंखों से कोई भी संदिग्ध चाहकर भी ओझल नहीं हो पाएगा.

यह चश्मा पूरी तरह ‘स्वदेशी’ है और इसे दिल्ली पुलिस ने एक निजी भारतीय कंपनी के साथ मिलकर एक साल में तैयार किया है. इस बार गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दर्जनों पुलिसकर्मी इन चश्मों को पहनकर कर्तव्य पथ और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में मुस्तैद रहेंगे. यह तकनीक न केवल अपराधियों को पकड़ने में मदद करेगी, बल्कि दिल्ली पुलिस की ‘टेक-सैवी’ छवि को भी दुनिया के सामने पेश करेगी.

यह चश्मा ‘फेस रिकग्निशन’ (चेहरा पहचानने वाली) तकनीक और अत्याधुनिक कैमरों से पूरी तरह लैस किया गया है. हर चश्मा एक विशेष मोबाइल डिवाइस से वायरलेस तरीके से जुड़ा होता है, जो पुलिसकर्मी की जेब या बेल्ट में लगा रहता है. यह चश्मा न केवल देखने का काम करता है, बल्कि सामने चल रही हर गतिविधि और चेहरे को लगातार स्कैन करके उसका डेटा प्रोसेस करता रहता है.
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सुरक्षा के इस डिजिटल चक्रव्यूह को और घातक बनाने के लिए इन मोबाइल डिवाइसेस में लगभग 65 हजार कुख्यात अपराधियों और आतंकवादियों का डेटाबेस फीड किया गया है. जैसे ही कोई वॉन्टेड अपराधी या संदिग्ध इस चश्मे के विजन क्षेत्र में आएगा तो यह पुलिसकर्मी को अलर्ट कर देगा. जिसके बाद बिना समय गंवाए संदिग्ध को भीड़ के बीच ही दबोचा जा सकता है.

इस एडवांस्ड एआई चश्मे की कार्यप्रणाली किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की तरह लगती है, जिसमें कैमरा, सेंसर और थर्मल इमेजिंग का बेजोड़ संगम है. परेड के दौरान यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित सामान लेकर घुसने की कोशिश करता है, तो यह चश्मा उसे तुरंत डिटेक्ट कर लेगा. यह एआई सिस्टम न केवल चेहरे बल्कि शरीर की बनावट और संदिग्ध व्यवहार का भी विश्लेषण करने में सक्षम है, जिससे सुरक्षा का स्तर कई गुना बढ़ जाता है.

चश्मे के भीतर लगा थर्मल स्कैनिंग फीचर इसे और भी खास बनाता है, जिसकी मदद से पुलिसकर्मी दूर से ही लोगों की बॉडी हीट को स्कैन कर सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति कपड़ों के भीतर हथियार या कोई संदिग्ध वस्तु छिपाकर लाया है, तो थर्मल सेंसर उसकी पहचान तुरंत कर लेंगे. यह फीचर भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बिना किसी को परेशान किए सुरक्षा जांच को अंजाम देने का सबसे प्रभावी तरीका बनकर उभरा है.

अक्सर देखा गया है कि बड़े अपराधी अपना हुलिया बदलकर या नकली दाढ़ी-मूंछ लगाकर सुरक्षा घेरे को चकमा देने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह एआई चश्मा उनके असली चेहरे को पहचान लेगा. एआई एल्गोरिदम चेहरे के उन बिंदुओं (Facial Points) को मैप करता है जो हुलिया बदलने पर भी नहीं बदलते, जिससे अपराधी की पहचान सुनिश्चित होती है. पहचान होते ही यह सिस्टम सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को भी अलर्ट भेजने में सक्षम है.

स्मार्ट पुलिसिंग के इस नए युग में यह चश्मा दिल्ली पुलिस के लिए एक ऐसी तीसरी आंख बन गया है जो कभी न सोएगी और न ही गलती करेगी. 65 हजार से अधिक अपराधियों के डेटा के साथ यह चश्मा किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एक मजबूत सुरक्षा दीवार की तरह काम करेगा.
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