भारत सरकार ने 6 गीगाहर्ट्ज (GHz) स्पेक्ट्रम बैंड के एक बड़े हिस्से को लाइसेंस-मुक्त करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इस फैसले के बाद अब बिना किसी अतिरिक्त फीस या नीलामी के इस फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल वाई-फाई सेवाओं के लिए किया जा सकेगा. यह कदम न केवल इंटरनेट की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य की सुपरफास्ट तकनीकों के लिए भी दरवाजे खोल देगा.

नई दिल्ली. दूरसंचार विभाग (DoT) ने इंटरनेट उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए 6 गीगाहर्ट्ज बैंड की 500 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी को लाइसेंस की बंदिशों से आजाद कर दिया है. पिछले साल मई में शुरू हुई इस प्रक्रिया पर अब अंतिम मुहर लग गई है. सरकार के इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब आपके घर और ऑफिस के वाई-फाई नेटवर्क पहले की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली और स्थिर होंगे.
अधिसूचना के अनुसार, 5925-6425 मेगाहर्ट्ज बैंड में कम पावर वाले वायरलेस एक्सेस सिस्टम के लिए अब किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी. यह फैसला अमेरिकी टेक दिग्गजों (एप्पल, मेटा, अमेजन) और घरेलू टेलीकॉम कंपनियों (जियो) के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच आया है. आइए समझते हैं कि इस फैसले से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
सुपरफास्ट स्पीड और कम रुकावट
अभी तक हम जिन वाई-फाई बैंड्स (2.4 GHz और 5 GHz) का उपयोग कर रहे हैं, उनमें डिवाइस की संख्या बढ़ने पर स्पीड कम हो जाती थी. अब 6 GHz बैंड मिलने से इंटरनेट का ‘ट्रैफिक जाम’ खत्म होगा और आपको वाई-फाई पर भी वैसी ही स्पीड मिलेगी जैसी फाइबर केबल पर मिलती है.
वाई-फाई 7 का रास्ता साफ
यह फैसला भारत में वाई-फाई 6ई (Wi-Fi 6E) और वाई-फाई 7 (Wi-Fi 7) जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों के लिए आधार तैयार करेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो ऑनलाइन गेमिंग, हाई-डेफिनिशन वीडियो कॉलिंग या 4K-8K वीडियो स्ट्रीमिंग करते हैं.
स्मार्ट होम्स के लिए वरदान
घर में एक साथ स्मार्ट टीवी, मोबाइल, लैपटॉप और सीसीटीवी जैसे दर्जनों डिवाइस जुड़ने पर भी सिग्नल ड्रॉप नहीं होंगे. दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों पर सैकड़ों लोग एक साथ बिना किसी बाधा के हाई-स्पीड इंटरनेट का उपयोग कर पाएंगे.
6G की ओर बढ़ता कदम
आईटीयू-एपीटी फाउंडेशन के अध्यक्ष भरत भाटिया के अनुसार, यह फैसला न केवल 5G सेवाओं को मजबूती देगा, बल्कि भारत को भविष्य की 6G तकनीक के लिए भी तैयार करेगा. इससे स्वदेशी ब्रॉडबैंड उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने का मौका मिलेगा.
टेलीकॉम वर्सेस टेक कंपनियों का रुख
जहाँ एप्पल और इंटेल जैसी टेक कंपनियां पूरे 1200 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को फ्री करने की मांग कर रही थीं, वहीं रिलायंस जियो का तर्क था कि इसकी नीलामी होनी चाहिए. फिलहाल सरकार ने इसके निचले हिस्से को फ्री करके एक बीच का रास्ता निकाला है, जिससे आम जनता को सीधे तौर पर तकनीक का लाभ मिल सके.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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