कम बजट में सेकंड-हैंड कार खरीदने के 5 जरूरी टिप्स


Used Car Buying Tips: कम बजट में गाड़ी तलाशने वालों के लिए सेकेंड हैंड कार बेहतर ऑप्शन है. बाजार में कई विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन अच्छा सौदा सुनिश्चित करने के लिए सही जानकारी और रणनीति अपनानी पड़ती है. सेकंड-हैंड कार खरीदते समय, आपको कार की कंडीशन, कीमत, विक्रेता की विश्वसनीयता और कानूनी दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए.

इससे न केवल पैसे की बचत होती है, बल्कि भविष्य में होने वाली समस्याओं से भी बचाव होता है. भारत में सेकंड-हैंड कार मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जहां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डीलर्स उपलब्ध हैं. लेकिन धोखाधड़ी से बचने के लिए रिसर्च जरूरी है. एक अच्छा सौदा वह है, जो वैल्यू फॉर मनी दे, जहां कार की लाइफ, माइलेज और मेंटेनेंस हिस्ट्री सही हो. जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें,क्योंकि ये महंगा पड़ सकता है. आइए उन 5 टिप्स और ट्रिक्स के बारे में जानते हैं, जो पूरानी कार खरीदते समय आपकी मदद करेंगे.

रिसर्च और बजट

सबसे पहले अपनी जरूरतों के अनुसार कार का मॉडल चुनें. ऑनलाइन साइट्स जैसे कारदेखो या कारवाले पर विभिन्न मॉडलों की कीमतें, फीचर्स और यूजर रिव्यूज देखें. सेकंड-हैंड कार की मार्केट वैल्यू जानें. उदाहरण के लिए 5 साल पुरानी कार की कीमत नई कीमत का 50-60 प्रतिशत हो सकती है. अपना बजट तय करें, जिसमें कार की कीमत के अलावा इंश्योरेंस, ट्रांसफर फीस और रिपेयर कॉस्ट शामिल हो. इससे आप ओवरपेमेंट से बचेंगे और सही विकल्प चुन सकेंगे.

सेलर और कार हिस्ट्री चेक करें

विश्वसनीय विक्रेता चुनें. अगर डीलर से खरीद रहे हैं, तो उसके रिव्यूज चेक करें. सेलर से बात करें और कार की सर्विस हिस्ट्री, दुर्घटना रिकॉर्ड मांगें. आरटीओ से वाहन रजिस्ट्रेशन डिटेल्स वेरिफाई करें. सुनिश्चित करें कि कार पर कोई लोन बकाया न हो. ओडोमीटर टैंपरिंग की जांच करें. प्रमाणित डीलर्स जैसे मारुति ट्रू वैल्यू से खरीदना सुरक्षित है, क्योंकि वे वारंटी देते हैं. इससे छिपी हुई समस्याओं से बचाव होता है.

फिजिकल इंस्पेक्शन और टेस्ट ड्राइव

कार को अच्छे से जांचें. बॉडी पर डेंट, रस्ट या पेंट मिसमैच देखें. टायर, ब्रेक, लाइट्स और इंटीरियर चेक करें. इंजन शुरू करके आवाज, स्मोक और लीकेज जांचें. अगर मैकेनिकल नॉलेज नहीं है, तो किसी एक्सपर्ट मैकेनिक से इंस्पेक्शन करवाएं. टेस्ट ड्राइव लें और अलग-अलग स्पीड पर चलाएं व ब्रेक टेस्ट करें. इससे परफॉर्मेंस का पता चलेगा.

डॉक्यूमेंट और लीगल चेक

सभी कागजात वेरिफाई करें. इसमें आरसी, इंश्योरेंस, पीयूसी, सर्विस बुक शामिल है. टैक्स पेड हैं या नहीं ये भी देखें. अगर इंटरस्टेट ट्रांसफर है, तो एनओसी जरूर लें. ओनरशिप ट्रांसफर प्रोसेस समझें. स्कैम से बचें और एडवांस पेमेंट बिना देखे न दें. बैंक ट्रांसफर से पेमेंट करें, ताकि रिकॉर्ड रहे.

नेगोशिएशन और फाइनल डील

मार्केट वैल्यू से कम ऑफर दें. कार की कमियों का हवाला देकर डिस्काउंट मांगें. कई विकल्प देखें और तुलना करें. अगर वारंटी मिल रही है, तो प्राथमिकता दें. फाइनल डील से पहले सब कुछ लिखित में लें. धैर्य रखें, जल्दबाजी न करें. इससे आप एक अच्छी कंडीशन वाली कार उचित कीमत पर पा सकेंगे.



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