2050 में एआई से दुनिया में मोबाइल, ट्रेन, मैमथ और लैब मांस में बदलाव


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2050 तक एआई, परमाणु बैटरी, जानवरों से संवाद, उन्नत धूल पहचान, पानी में शहर, मैमथ की वापसी, सुपरफास्ट ट्रेन और लैब में मांस जैसी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

खेलने वाले छोटे बच्चों से लेकर सुबह लाठी लेकर वॉक पर जाने वाले बुज़ुर्गों तक, हर किसी की ज़ुबान पर सिर्फ एक ही विषय है- ‘एआई!’ एआई पहले ही कई बदलाव ला चुका है, ले-ऑफ (नौकरी से निकाले जाने) की खबरें भी तेज़ी से सामने आ रही हैं. आप आर्ट्स के हों, साइंस के हों या कॉमर्स के- यह अब मायने नहीं रखता; ‘एआई सीखकर आइए’ जैसी हिदायतें विदेशों में भी देखने को मिल रही हैं. सिर्फ पांच साल में दुनिया को इस तरह बदलकर रोमांच पैदा करने वाला एआई, आखिर 2050 तक कैसा होगा? आइए जानते हैं…

100 साल तक मोबाइल चार्ज करने की ज़रूरत नहीं: 2050 तक मोबाइल बैटरी चार्जिंग का तरीका पूरी तरह बदल सकता है. परमाणु कचरे (न्यूक्लियर वेस्ट) का पुनः उपयोग करके परमाणु बैटरी बनाई जाएगी. इससे आपको बार-बार मोबाइल चार्ज करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी-जब तक आप रहेंगे, तब तक मोबाइल की बैटरी भी चलती रहेगी!

जानवरों से बात कर सकेंगे: पहले जब पंचतंत्र लिखा गया था, तब उसमें जानवरों के माध्यम से कहानियां सुनाई जाती थीं. वह राजा भोज के समय की कथा मानी जाती है- वह काल्पनिक थी या वास्तविक, इस पर अब बहस छोड़ दीजिए, क्योंकि अब हम जानवरों की भाषा समझ सकेंगे. इसके लिए एआई एक ब्रिज का काम करेगा, जो इंसानों और जानवरों के बीच संवाद संभव बनाएगा.

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उन्नत धूल पहचान प्रणाली: वातावरण में मौजूद धूल और विषैले तत्वों की पहचान करने के लिए अत्याधुनिक सेंसर विकसित किए जाएंगे. ये सेंसर पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करेंगे और लगातार काम करते रहेंगे. इनकी मदद से वातावरण और प्रदूषण की रियल-टाइम तथा सटीक जानकारी मिल सकेगी. हालांकि, इससे इंसानों की निजता (प्राइवेसी) पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका भी रहेगी.

शहर पानी में: 2050 तक ज़मीन की कमी बढ़ सकती है और प्लॉट मिलना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में पानी पर बने घर, तैरते हुए पहाड़-जैसी संरचनाएं और दुनिया भर में छोटे-छोटे कृत्रिम द्वीप देखने को मिल सकते हैं. कुछ शहर तो पानी के नीचे भी बसाए जा सकते हैं. इस दिशा में अभी से कई परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं. 2050 तक 3D तकनीक की मदद से पानी में आराम से, शायद एक ही दिन में पूरा शहर तैयार करना संभव हो सकता है.

मैमथ फिर लौट सकते हैं: आइस एज के दौर में पाए जाने वाले विशाल जीव मैमथ को फिर से जीवित करने की कोशिशें जारी हैं. इस दैत्याकार हाथी जैसे प्राणी को पुनर्जीवित करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. कहा जा रहा है कि 2027 तक इस दिशा में बड़ी सफलता मिल सकती है. 2050 तक शायद आप मैमथ का एक खास ज़ू भी देख सकें.

विमान को टाटा बाय-बाय: 2050 तक बुलेट ट्रेन की रफ्तार 600 किमी/घंटा से बढ़कर 1200 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है. ऐसी तेज़ रफ्तार ट्रेनों का नेटवर्क दुनिया भर में फैल सकता है. नतीजा ये होगा कि भविष्य में हवाई जहाज़ लोकल बस की तरह आम और कम जरूरी हो सकते हैं-लोग लंबी दूरी के सफर के लिए भी सुपरफास्ट ट्रेनों को प्राथमिकता देंगे.

लैब में मांस: त्योहारों पर जानवरों की बलि देने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. 2050 तक आप सीधे लैब के दरवाज़े पर जाकर किलो के हिसाब से मांस प्राप्त कर सकेंगे. सबसे बड़ी हैरानी की बात यह होगी कि इसमें एक भी जानवर की जान नहीं जाएगी. कम खर्च में जितना चाहे उतना मांस उपलब्ध होगा.

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