India AI Impact Summit 2026: भारत में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की शुरुआत आज 16 फरवरी 2026 से हो रही है, जोकि 20 फरवरी 2026 तक चलेगा. इस महत्वपूर्ण आयोजन में गूगल डीपमाइंड, एंथ्रोपिक, एडोब, सेल्सफोर्स, क्वालकॉम और फेडेक्स के सीईओ सहित वैश्विक राष्ट्राध्यक्ष और प्रौद्योगिकी जगत की दिग्गज हस्तियां एक साथ आएंगी. उम्मीद है कि, इस सशक्त सम्मेलन के परिणामस्वरूप एक ऐतिहासिक सर्वसम्मति की घोषणा हो सकती है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ‘महाकुंभ’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026’ का उद्घाटन करेंगे. इसमें 65 देशों की मौजूदी रहेगी और इसके साथ ही दुनियाभर की प्रमुख कंपनियों के सीईओ भी शामिल होंगे. एक्सपों और समिट के दौरान AI से दुनियाभर के हर व्यक्ति को क्या लाभ है, एआई के बदलाव और भविष्य को लेकर भी चर्च होगी. इस आयोजन का मनोरथ ग्लोबल एआई इकोसिस्टम में नए पार्टनरशिप को बढ़ावा देना है.
क्या बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे. इससे पहले X पर उन्होंने एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि- “यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि India AI Impact Summit के लिए दुनियाभर से लोग भारत आ रहे हैं. इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है. यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास में अहम योगदान दे रहा है. दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये। विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।।”
यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि India AI Impact Summit के लिए दुनियाभर से लोग भारत आ रहे हैं। इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है। यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास… pic.twitter.com/7gxXJEtpOz
— Narendra Modi (@narendramodi) February 16, 2026
श्लोक का क्या अर्थ है
दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये। विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।। का अर्थ है- दान, तप, शौर्य, विज्ञान, विनय और नेतृत्व के संसार में सदैव उत्कृष्ट से उत्कृष्टतर उदाहरण प्राप्त हो जाते हैं. क्योंकि यह पृथ्वी अनेक अनमोल रत्नों से भरी है. अत: विज्ञान व प्रविधि आदि के क्षेत्रों में नित नए आविष्कारों तथा नवाचारों पर किसी को विस्मय नहीं होना चाहिए.
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