AI Voice Cloning Scam: भारत में बुजुर्ग और महिलाओं को कैसे बचाएं.


दिल्ली की रहने वाली 65 वर्षीय राधा देवी को एक शाम अचानक फोन आया. आवाज उनकी बेटी की लग रही थी-रोते हुए कह रही थी, ‘मम्मी, मैं मुश्किल में हूं… मुझे किडनैप कर लिया है… पापा से कहो, पैसे भेजो, वरना…’राधा का दिल बैठ गया.’ स्कैमर ने सोशल मीडिया से कुछ सेकंड्स का ऑडियो लेकर AI से उनकी बेटी की आवाज क्लोन की थी. आवाज़ सुनते ही बिना सोचे-समझे राधा ने UPI से 2 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.

बाद में पता चला, बेटी तो घर पर सुरक्षित थी. यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भारत में तेजी से फैल रहे AI वॉयस क्लोनिंग स्कैम की हकीकत है, जहां स्कैमर्स परिवार की आवाज नकल करके इमोशनल ब्लैकमेल करते हैं.

क्या है AI Voice Cloning?
AI वॉयस क्लोनिंग कैसे काम करता है? स्कैमर्स फेसबुक, इंस्टाग्राम या वॉट्सऐप से आपके या आपके अपनों के वीडियो/ऑडियो चुराते हैं. एडवांस AI टूल्स से सिर्फ 3-5 सेकंड्स में आवाज क्लोन कर लेते हैं. फिर अनजान नंबर से कॉल करके ‘एक्सीडेंट’, ‘किडनैप’ या ‘जेल’ जैसी स्टोरी बनाते हैं. भारत में ऐसे स्कैम्स बहुत तेजी बढ़ रहे हैं. 2025 में साइबर क्राइम रिपोर्ट्स में AI फ्रॉड 40% बढ़ा है.

इसमें महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा टारगेट होते हैं, क्योंकि वे इमोशनली वल्नरेबल हैं. US में भी, 60+ उम्र के लोगों ने 2024 में ऐसे स्कैम्स से $4.9 बिलियन गंवाए है, और भारत में भी बुजुर्ग महिलाओं के केस बढ़े हैं, जैसे फ्लोरिडा की एक मदर ने AI क्लोन वॉयस से $15,000 खोए.

यहां तक कि एरिजोना में एक महिला को लगा बेटी किडनैप हुई, लेकिन AI ट्रिक थी.

FBI चेतावनी देती है कि AI स्कैम्स की ‘बिलीवेबिलिटी’ बढ़ गई है. इसलिए जरूरी है कि हम खुद की और एक दूसरे की सेफ्टी का खास ख्याल रखें.

  1. महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सेफ्टी गाइड:
    सबसे पहले, फैमिली कोड वर्ड बनाएं- एक सीक्रेट शब्द जो सिर्फ परिवार जानता हो. संदिग्ध कॉल पर पूछें, अगर जवाब गलत तो स्कैम.
  2. दूसरा, कॉलर को वेरिफाई करें- कॉल कट करके अपनों के असली नंबर पर कॉल बैक करें. अनजान नंबर से आने वाली ‘इमरजेंसी’ पर कभी पैसे न भेजें.
  3. तीसरा, AI डिटेक्ट करें: अजीब सवाल पूछें जैसे ‘हमारा आखिरी डिनर क्या था?’ अगर जवाब हिचकिचाहट या गलत, तो अलर्ट.
  4. चौथा, सोशल मीडिया प्राइवेसी: वॉयस क्लिप्स पब्लिक न शेयर करें, प्रोफाइल प्राइवेट रखें.
  5. पांचवां, बैंक डिटेल्स कभी फोन पर न दें- UPI पिन, OTP या CVV शेयर न करें. अगर स्कैम हो गया, तुरंत पुलिस या साइबर सेल (1930) पर रिपोर्ट करें. ऐप्स जैसे McAfee या Truecaller यूज करें, जो AI स्कैम डिटेक्ट करते हैं.

ये स्कैम्स न सिर्फ पैसे चुराते हैं, बल्कि मेंटल हेल्थ प्रभावित करते हैं. महिलाएं और बुजुर्ग घर में अकेले रहते हैं, इसलिए फैमिली सपोर्ट जरूरी. जागरूकता से बचाव संभव है, क्योंकि AI जितना स्मार्ट, उतना ही सावधान रहना जरूरी.



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