यहां हम तीन आसान और कारगर ट्रिक्स बता रहे हैं, जिन्हें अपनाने से बच्चा खुद फोन कम मांगेगा.
पहली ट्रिक: फिक्स्ड स्क्रीन टाइम रूल बनाएं और फोन की सेटिंग में बदलाव करें
सबसे पहले घर में एक साफ नियम बनाएं कि फोन या टैबलेट सिर्फ तय समय पर ही इस्तेमाल होगा, जैसे दिन में 30-60 मिनट से ज्यादा नहीं. बच्चे को पहले से बता दें कि ‘खेलने के बाद 30 मिनट फोन, फिर बंद!’
फोन की सेटिंग में जाकर स्क्रीन टाइम लिमिट लगा दें. एंड्रॉयड या आईफोन में पैरेंटल कंट्रोल ऑन करें, जहां आप ऐप्स को लॉक कर सकते हैं या समय खत्म होने पर ऑटोमैटिक बंद हो जाए. जब बच्चा बार-बार मांगे तो प्यार से कहें,
‘देखो, टाइमर खत्म हो गया, अब हम साथ कुछ और खेलेंगे.’ इससे बच्चे को लगेगा कि नियम सबके लिए हैं, न कि सिर्फ उस पर रोक लगी है. धीरे-धीरे वह आदत डाल लेगा और जिद कम होगी.
दूसरी ट्रिक: बच्चे को बोरियत से बचाएं, वैकल्पिक मजेदार काम दें
ज्यादातर बच्चे फोन इसलिए मांगते हैं क्योंकि उन्हें कुछ और करने को नहीं मिलता. बोर होने पर फोन सबसे आसान लगता है.
इसलिए घर में दूसरी एक्टिविटी बढ़ाएं. जैसे- बाहर पार्क में खेलना, साइकिल चलाना, घर में बोर्ड गेम खेलना, पेंटिंग करना, किताब पढ़ना या साथ मिलकर खाना बनाना. बच्चे को शामिल करें, जैसे ‘आज हम सब मिलकर टेंट बनाएंगे!’ या ‘चलो, तुम्हारी फेवरेट स्टोरी सुनाऊं.’
जब बच्चा व्यस्त रहेगा तो फोन की याद ही नहीं आएगी. शुरुआत में मुश्किल लगेगा, लेकिन 7-10 दिन में फर्क दिखेगा. बच्चा खुद कहेगा, ‘मम्मी, चलो खेलें!’
तीसरी ट्रिक: खुद रोल मॉडल बनें, परिवार साथ मिलकर कम फोन यूज करें
बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं. अगर मम्मी-पापा खुद दिनभर फोन में लगे रहें तो बच्चा भी वैसा ही करेगा.
सबसे पहले खुद फोन कम यूज करें. खाना खाते वक्त, बात करते वक्त या बच्चे के साथ खेलते वक्त फोन साइड में रखें. परिवार में ‘नो फोन जोन’ बनाएं, जैसे डिनर टेबल या बेडरूम में फोन न लाएं. सब मिलकर गेम खेलें, बातें करें या घूमने जाएं.
जब बच्चा देखेगा कि घर में सब फोन कम यूज कर रहे हैं तो वह भी आसानी से मान जाएगा. ये ट्रिक सबसे ज्यादा असरदार है क्योंकि बच्चा कॉपी करता है.
इन तीन ट्रिक्स को अपनाने से न सिर्फ बच्चे की फोन मांगने की आदत कम होगी, बल्कि परिवार में प्यार, बातचीत और खुशी बढ़ेगी. शुरुआत में बच्चा रो सकता है या जिद कर सकता है, लेकिन प्यार और धैर्य से समझाएं.
कुछ हफ्तों में सेटिंग बदल जाएगी और बच्चा ज्यादा खुश, एक्टिव और क्रिएटिव बनेगा. याद रखें, फोन एक टूल है, जिंदगी नहीं. बच्चे की असली खुशी बाहर खेलने, दोस्तों से मिलने और परिवार के साथ समय बिताने में है.
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