
गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु और पितरों से जुड़े कई रहस्यों का उल्लेख है। धार्मिक रहस्योद्घाटन के अनुसार, घर में पितरों की तस्वीरें सही स्थान पर रखने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, जबकि गलत स्थान पर बने रहने से मनोवैज्ञानिक क्षरण और नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं। हालाँकि इन दस्तावेज़ों को धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाता है, इनका उद्देश्य परिवार में सम्मान और संतुलन बनाए रखना माना जाता है।
चित्रांकन की सही दिशा कौन सी है?
वास्तु और धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार, दक्षिण दिशा के लिए दक्षिण दिशा की तस्वीरों का उपयोग सबसे उपयुक्त माना जाता है। कहा जाता है कि दक्षिण दिशा के पितरों से जुड़ी हुई मणियां बनती हैं। इसलिए घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार पर चित्र लगाना शुभ माना जाता है। जब चित्र इस प्रकार दिया जाता है कि मित्र का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो, तो उसे सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ दिया जाता है। कई परिवार इसी परंपरा का पालन करते हैं और पितरों को सम्मान देने के लिए एक निश्चित स्थान तय करते हैं।
मंदिर में क्यों नहीं लगानी चाहिए दोस्ती की तस्वीरें?
कई धार्मिक मंत्रों के अनुसार, पूज्यों का सम्मान भगवान के रूप में होता है, लेकिन उन्हें समान देवी-देवताओं के स्थान पर नहीं रखा जाता है। इसलिए घर के पूजा स्थल में भगवान की प्रतिमा के साथ चित्र लगाना नहीं माना जाता है। मान्यता है कि पूजा स्थान केवल साहारा देवी-देवताओं के लिए होता है, जबकि पितरों के लिए अलग और पूजन स्थान होना चाहिए।
रसोई और सब्जियों के पास चित्रांकन क्यों किया जाता है मन?
घर की रसोई को परिवार के पोषण और ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। वास्तुशिल्प के अनुसार, यहां मित्र की तस्वीरें देखने से बचना चाहिए। इसी तरह के चित्रों के पास या ऐसी जगह जहां बार-बार की सुविधा होती है, वहां चित्र लगाने से भी सहयोग करने की सलाह दी जाती है। सिद्ध है कि तस्वीरें ऐसी जगह होनी चाहिए जहां उन्हें सम्मान मिले और घर के सदस्य शांति से उनका स्मरण कर सकें।
जीवित लोगों की तस्वीर के साथ और दोस्ती की तस्वीर
वास्तुशिल्प में यह भी कहा गया है कि मृत अवशेषों को जीवित परिवार के सदस्यों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इसे संतुलन के बीच और ऊर्जा के दावे से नहीं माना जाता है। इसलिए परिवार की तस्वीरें और पितरों की तस्वीरों के लिए अलग-अलग जगह रखना सबसे अच्छा माना जाता है।
घर के ब्रह्मस्थान में भी स्थापित करें आश्रम
घर का मध्य भाग यानी ब्रह्मस्थान वास्तु में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सिद्धांत यह है कि यहां पार्टी की तस्वीरें देखने से बचना चाहिए। यह स्थान घर की ऊर्जा के संतुलन से कम माना जाता है। इसी तरह मुख्य द्वार के ठीक सामने ऐसी तस्वीरें लगाने से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि हर आने-जाने वाले की नजर सीधे उस पर पड़ती है।
समुद्र तट पर किन बातों का ध्यान रखें?
चित्रांकन समय कुछ छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
तस्वीर हमेशा साफ और शोरूम पर। बहुत अधिक संख्या में तस्वीरें शामिल से सहेजा गया. ऐसी तस्वीर चुनें जिसमें पूर्वज पसंदीदा मुद्रा दिखाई दे। तस्वीर को नियमित रूप से साफ रखें। तस्वीर के आसपास अजनबियों न रहें।
ज्योतिष और वास्तुशिल्प को देखना क्या है जरूरी?
ज्योतिष और वास्तुशिल्प में घर की दिशाएं और ऊर्जा का विशेष महत्व है। सिद्धांत यह है कि जिस स्थान पर हम श्रद्धावान और सम्मानित होते हैं, वहां सकारात्मक भाव मजबूत होते हैं। मूर्ति की तस्वीर केवल एक स्मृति नहीं है, बल्कि परिवार की परंपरा और मूर्ति से मूर्ति का प्रतीक है। इसलिए इसका उद्देश्य डर नहीं, बल्कि सम्मान और संतुलन होना चाहिए।
(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और शर्ते सामान्य सीटू पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 उपयोगकर्ता पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)
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