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भगवान गणेश को कौन से फूल बेहद प्रिय हैं और किन फूलों से हैं परहेज? जानिए

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 14, 2026
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सनातन धर्म में बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित है। भगवान गणेश की पूजा किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में चढ़ाई जाने वाली हर सामग्री का अपना विशेष महत्व होता है। ऐसे में फूलों का चयन भी सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि कुछ फूल भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय माने गए हैं, जबकि कुछ फूल उनकी पूजा में वर्जित बताए हैं। आइए जानते हैं कि गणपति बप्पा को कौन से फूल अर्पित करने चाहिए और किन फूलों से परहेज करना चाहिए।

पूजा में फूलों का क्यों है महत्व?

धार्मिक ग्रंथों में पूजा के दौरान फूलों को श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना है। भगवान को उनके प्रिय फूल अर्पित करने से पूजा अधिक फलदायी मानी गई है। इसलिए जिस देवी-देवता की आराधना की जा रही हो, उन्हें उनकी पसंद के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

गेंदे का फूल: भगवान गणेश की पूजा में गेंदे के फूल सबसे अधिक चढ़ाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन फूलों को अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और आर्थिक परेशानियां दूर होने का आशीर्वाद मिलता है।

गुड़हल का फूल: गुड़हल का फूल भी गणपति बप्पा को प्रिय है। मान्यता है कि इसे अर्पित करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही भगवान गणेश भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।

पारिजात, कंद और अपराजिता के फूल: पारिजात का फूल संतान सुख की कामना करने वालों के लिए शुभ माना जाता है। कंद के फूल चढ़ाने से घर में सुख-शांति और पारिवारिक प्रेम बना रहने की मान्यता है। वहीं अपराजिता के फूल भगवान गणेश को अर्पित करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होने की मान्यता प्रचलित है।

इन फूलों से करें परहेज

  • भगवान गणेश की पूजा में केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव को यह फूल प्रिय नहीं है, इसलिए गणेश जी की पूजा में भी इसका उपयोग वर्जित माना गया है।
  • इसके अलावा सफेद कनेर और सफेद चमेली जैसे सफेद फूल भी गणेश पूजा में अर्पित न करें। मान्यता है कि इनका संबंध चंद्रमा से माना जाता है और इन्हें गणेश पूजा में उपयुक्त नहीं माना गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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