धर्म-ज्योतिष अनुसार मां दुर्गा के ये स्वरूप बेहद शक्तिशाली, रहस्यमयी और परिवर्तन लाने वाले माने जाते हैं। कहते हैं माता के इन रूपों की उपासना करने से समस्त मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। महाभागवत पुराण अनुसार, जब माता सती अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में जाना चाहती थीं, तब भगवान शिव ने उन्हें वहां जाने से मना कर दिया था। जिस पर माता सती को क्रोध आ गया और उन्होंने एक साथ अपने दस उग्र रूप प्रकट कर दिए। कहते हैं इन दस रूपों ने दसों दिशाओं को घेर लिया था जिससे भगवान शिव वहां से जा न पाएं। कहते हैं माता शक्ति के यही दस स्वरूप दस महाविद्या के नाम से जाने जाते हैं। चलिए जानते हैं माता के इन स्वरूपों का महत्व।
मां काली
दस महाविद्याओं का पहला और प्रमुख स्वरूप मां काली हैं। माता के इस स्वरूप को भगवान शिव की छाती पर पैर रखे हुए दर्शाया जाता है। माता का यह रूप अहंकार का नाश करने वाला और मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है। मां काली का संबंध शनि ग्रह से माना गया है। इसी कारण से माता के इस स्वरूप की उपासना से शनि दोषों से छुटकारा मिल जाता है।
मां तारा
मां तारा का स्वरूप देवी काली से ही मिलता-जुलता है। कहते हैं मां तारा की उपासना से जीवन की परेशानियां दूर हो जाती हैं और गुरु ग्रह भी मजबूत हो जाता है। कहते हैं माता के इस स्वरूप का पूजन ज्ञान और मोक्ष प्रदान करता है।
त्रिपुरा सुंदरी
त्रिपुरा सुंदरी का अर्थ है तीनों लोकों में सबसे सुंदर। मां का ये स्वरूप दिव्य सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। कहते हैं इस स्वरूप की उपासना से बुध ग्रह मजबूत होता है।
मां भुवनेश्वरी
देवी भुवनेश्वरी को ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। कहते हैं मां भुवनेश्वरी सृष्टि पर नियंत्रण रखती हैं और इनकी पूजा से चंद्र ग्रह मजबूत होता है। जिससे जीवन में सुख-शांति आती है।
मां भैरवी
मां का यह स्वरूप अग्नि के समान तेजस्वी माना गया है। देवी विनाश के माध्यम से परिवर्तन लेकर आती है और इनका संबंध लग्न से होता है। इनकी पूजा से नकारात्मकता हो जाती है।
मां छिन्नमस्ता
माता का यह स्वरूप सबसे रहस्यमयी स्वरूपों में से एक है। देवी इस रूप में अपना ही कटा हुआ सिर हाथ में लिए हुए दिखाई देती हैं। इन्हें त्याग औप कुंडलिनी जागरण का प्रतीक माना जाता है। मां के इस स्वरूप की पूजा करने से राहु ग्रह से जुड़े दोषों से मुक्ति मिलती है।
मां धूमावती
मां दुर्गा अपने इस स्वरूप में एक विधवा के रूप में पूजी जाती हैं। माता के इस स्वरूप की पूजा सुहागिन महिलाएं नहीं करती हैं। माता का यह स्वरूप अहंकार के अंत और जीवन के अनुभवों का प्रतीक हैं। देवी धूमावती का संबंध केतु ग्रह से माना गया है।
मां बगलामुखी
मां बगलामुखी शत्रुओं को पराजित करने वाली देवी मानी जाती हैं। कहते हैं माता के इस स्वरूप की पूजा करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है। साथ ही कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
मां मातंगी
मां मातंगी कला, ज्ञान और वाणी की देवी मानी जाती हैं। कहते हैं इनकी उपासना से सूर्य ग्रह मजबूत होता है और ज्ञान में वृद्धि होती है। माता अपने भक्तों को प्रसिद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
मां कमला
मां कमला दस महाविद्याओं में माता का दसवां स्वरूप है। इन्हें कमल पर विराजमान दिखाया जाता है। देवी के इस स्वरूप की उपासना से शुक्र ग्रह मजबूत होता है। जिससे जातक को धन, समृद्धि और सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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