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पार्थिव शिवलिंग पूजा के नियम क्या हैं? शिव पुराण के अनुसार जानें बनाने की सही विधि और जरूरी सावधानियां

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 25, 2026
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सावन के महीने में पार्थिव यानी मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व बताया है। मान्यता है कि सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साधक को मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही इस महीने पार्थिव शिवलिंग की पूजा को सबसे सरल और शुभफलदायी उपाय माना गया है। तो चलिए जानते हैं पार्थिव शिवलिंग बनाने की सही विधि और इसकी पूजा के नियम क्या हैं।

शिव पुराण में मिलता है उल्लेख

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले समुद्र तट पर मिट्टी से शिवलिंग बनाकर महादेव की आराधना की थी। तभी से पार्थिव शिवलिंग पूजा की परंपरा का विशेष महत्व है। वहीं, शिव पुराण में भी कलियुग में इस पूजा को भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सरल माध्यम बताया है। श्रद्धा और नियमों के साथ की गई यह पूजा जीवन की बाधाओं को दूर करने और मनोकामना पूर्ति में सहायक मानी गई है।

ऐसे बनाएं पार्थिव शिवलिंग

पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए शुद्ध और पवित्र मिट्टी का उपयोग करें। मान्यता है कि यह मिट्टी नदी, तालाब या बेलपत्र या तुलसी के पास की जगह से ली जा सकती है। मिट्टी को गंगाजल, दूध, भस्म और अन्य पूजन सामग्री से शुद्ध करने के बाद शिव मंत्रों का स्मरण करते हुए शिवलिंग का निर्माण किया जाता है। पूजा के समय साधक का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।

पार्थिव शिवलिंग निर्माण के नियम

पार्थिव शिवलिंग का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। इसे अंगूठे के आकार से लेकर अधिकतम 12 अंगुल तक बनाना उचित माना गया है। पूजा के बाद उसी दिन पार्थिव शिवलिंग का जल में विसर्जन कर देना चाहिए। इसे अगले दिन तक घर में रखना उचित नहीं माना जाता। साथ ही शिवलिंग पर चढ़ाई गई पूजन सामग्री का सेवन करने से भी बचें।

बेलपत्र पर ऐसे करें शिवलिंग की स्थापना

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र पर स्थापित पार्थिव शिवलिंग की पूजा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इसके लिए सबसे पहले तीन पत्तियों वाला साफ और बिना कटा-फटा बेलपत्र लें। इसे पूजा की चौकी पर इस तरह रखें कि उसकी डंडी दक्षिण दिशा की ओर रहे और बीच वाली पत्ती उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो। इसके बाद शुद्ध मिट्टी से सुंदर शिवलिंग बनाकर उसे बेलपत्र की बीच वाली पत्ती पर स्थापित करें। संभव हो तो मिट्टी की छोटी जलाधारी भी बनाएं, जिसका ढलान उत्तर दिशा की ओर रखा जाए। स्थापना के बाद जलाभिषेक करें और चंदन, अक्षत, पुष्प और बेलपत्र अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करें।

पार्थिव शिवलिंग न पाए तो क्या करें?

अगर पार्थिव शिवलिंग बनाना संभव न हो तो शिवलिंग पर चंदन से त्रिपुंड की तीन रेखाएं बनाकर भी भगवान शिव की आराधना की जा सकती है। शिव पुराण में इसे भी पार्थिव पूजा का एक सरल विकल्प बताया गया है। श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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