सचिन से लंबी करियर, विराट से ज्यादा फिट, 52 साल की उम्र में खेला अंतिम टेस्ट, बनाए 39000 रन, 4000 से ज्यादा विकेट


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cricket record: विल्फ्रेड रोड्स क्रिकेट इतिहास के एक ऐसे महान और अविश्वसनीय स्तंभ हैं, जिनका रिकॉर्ड आधुनिक युग के दिग्गज जैसे सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली भी कभी नहीं तोड़ सकते. 1899 में डेब्यू करने से लेकर 1930 में अपना आखिरी मैच खेलने तक, रोड्स का इंटरनेशनल करियर पूरे 30 साल और 315 दिनों तक चला.

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विल्फ्रेड रोड्स vs 30 साल टेस्ट खेलकर बनाया था अनोखा रिकॉर्ड

नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में जहां आज के खिलाड़ी 10-15 साल में ही थक जाते हैं या संन्यास ले लेते हैं, वहीं एक खिलाड़ी ऐसा भी था जिसने तीन दशकों तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों और गेंदबाजों को छकाया. वह केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि क्रिकेट के मैदान पर लंबी उम्र और निरंतरता की एक चलती-फिरती मिसाल थे. विल्फ्रेड रोड्स क्रिकेट इतिहास के एक ऐसे महान और अविश्वसनीय स्तंभ हैं, जिनका रिकॉर्ड आधुनिक युग के दिग्गज जैसे सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली भी कभी नहीं तोड़ सकते. 1899 में डेब्यू करने से लेकर 1930 में अपना आखिरी मैच खेलने तक, रोड्स का इंटरनेशनल करियर पूरे 30 साल और 315 दिनों तक चला.

प्रथम श्रेणी क्रिकेट के ‘अमर राजा’विल्फ्रेड रोड्स के फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के आंकड़े इतने विशाल हैं कि वे किसी परीकथा जैसे लगते हैं. उन्होंने अपने जीवन में कुल 1,110 फर्स्ट-क्लास मैच खेले. यह एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड है जिसे आज के समय में छूना भी नामुमकिन है. अपने इस विशाल करियर में रोड्स ने किसी एक विधा में नहीं, बल्कि ऑलराउंड खेल में महारत हासिल की. एक गेंदबाज के रूप में शुरुआत करके मध्यक्रम और फिर ओपनर के तौर पर इतने रन बनाना उनकी अद्भुत क्षमता को दिखाता है. वह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 4,000 विकेट और 39,000 से अधिक रन बनाने वाले दुनिया के इकलौते क्रिकेटर हैं.

1926 की एशेज और वो ऐतिहासिक वापसी

रोड्स के करियर का सबसे सुनहरा और रोमांचक अध्याय 1926 में लिखा गया. इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रतिष्ठित एशेज सीरीज चल रही थी. शुरुआती चार टेस्ट मैच ड्रॉ हो चुके थे और सीरीज 0-0 की बराबरी पर थी. ओवल में होने वाला आखिरी मैच निर्णायक था. इंग्लैंड के चयनकर्ताओं ने एक बेहद चौंकाने वाला और साहसी फैसला लिया. उन्होंने 48 साल की उम्र में विल्फ्रेड रोड्स को टीम में वापस बुलाया. रोड्स ने तब अपना पिछला टेस्ट मैच छह साल पहले (1920 में) खेला था. आलोचकों को लगा कि यह फैसला आत्मघाती साबित होगा, लेकिन रोड्स ने मैदान पर उतरकर इतिहास बदल दिया. रोड्स ने न केवल मैच खेला, बल्कि अपनी जादुई स्पिन गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलिया की मजबूत बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। उन्होंने मैच में 6 विकेट (पहली पारी में 2 और दूसरी पारी में 4 विकेट) चटकाए। उनकी इस घातक गेंदबाजी की बदौलत इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को करारी शिकस्त दी और एशेज ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया. 48 साल के एक बुजुर्ग खिलाड़ी ने इंग्लैंड को वो ऐतिहासिक जीत दिलाई जिसे देश सदियों तक याद रखेगा.

सचिन-विराट से भी आगे क्यों?

क्रिकेट जगत में सचिन तेंदुलकर को ‘गॉड ऑफ क्रिकेट’ कहा जाता है क्योंकि उनका इंटरनेशनल करियर 24 साल लंबा रहा. वहीं विराट कोहली अपनी फिटनेस और रन बनाने की भूख के लिए जाने जाते हैं लेकिन विल्फ्रेड रोड्स का रिकॉर्ड इन दोनों दिग्गजों के कद से भी बड़ा नजर आता है. 30 साल से ज्यादा का टेस्ट करियर बनाए रखना, 52 साल की उम्र तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना और 1,110 मैच खेलना—ये ऐसी उपलब्धियां हैं जिन्हें हासिल करने के लिए आज के दौर में कम से कम दो जन्म लेने पड़ेंगे. विल्फ्रेड रोड्स का जीवन और उनका खेल यह साबित करता है कि उम्र केवल एक संख्या है यदि आपके पास खेल के प्रति अटूट समर्पण, अनुशासन और जूनून है, तो आप किसी भी उम्र में इतिहास रच सकते हैं. रोड्स का नाम क्रिकेट के पन्नों पर हमेशा के लिए सोने के अक्षरों में दर्ज रहेगा, क्योंकि उनके बनाए कुछ रिकॉर्ड्स समय की सीमाओं को पार कर अमर हो चुके हैं.

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Rajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…

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