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Saransh Jain: ‘चोट लगती तो पट्टी बांधकर खेलता था’, सारांश के चयन पर भावुक हुईं मां; बताया कैसे घर की छत से टीम इंडिया तक पहुंचा बेटा

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 28, 2026
3 min read 1.2k views


होमखेलक्रिकेट‘चोट लगती तो पट्टी बांधकर खेलता था’, सारांश के टीम इंडिया में चयन पर मां भावुक

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saransh jain cricket journey: 33 वर्षीय इंदौर के ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन पिछले एक दशक से घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने दिसंबर 2014 में मध्य प्रदेश के लिए अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था. इसके बाद वह धीरे-धीरे मध्य प्रदेश, सेंट्रल जोन और रेस्ट ऑफ इंडिया की टीमों के अहम खिलाड़ी बन गए. अब जब उन्हें श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में चुना गया तो यह न सिर्फ उनके बल्कि पूरे परिवार के लिए एक गर्व का पल था.

'चोट लगती तो पट्टी बांधकर खेलता था', सारांश के टीम इंडिया में चयन पर मां भावुकZoom

33 साल के सारांश जैन का भारतीय टेस्ट टीम में चयन.

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचने का सारांश जैन का सफर किसी क्रिकेट अकादमी से नहीं, बल्कि इंदौर में उनके घर की छत से शुरू हुआ था. मध्यप्रदेश के ऑलराउंडर सारांश को अगले महीने श्रीलंका में खेली जाने वाली टेस्ट सीरीज के लिए पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है. उनके चयन के बाद उनके परिवार में जश्न का माहौल है. सारांश के पिता सुबोध जैन भी मध्यप्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं. जब सारांश छोटे थे, तब सुबोध जैन उन्हें घर की छत पर घंटों अभ्यास कराते थे.

छत से शुरू हुआ सफर
सारांश की मां संगीता जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘जब भी मेरे पति को समय मिलता था, वह छत पर नेट लगाकर सारांश को अभ्यास करवाते थे. कई बार खेलते समय सारांश के हाथ में चोट लग जाती थी, लेकिन वह कभी पीछे नहीं हटता था. पट्टी बांधकर फिर अभ्यास शुरू कर देता था. उन्होंने बताया कि बचपन में सारांश के क्रिकेट अभ्यास से कई बार पड़ोसियों को परेशानी भी होती थी.

बेटे की चयन पर भावुक हो गईं मां
बेटे की उपलब्धि पर भावुक मां ने कहा, ‘छत पर सारांश के अभ्यास से कई बार पड़ोसियों की खिड़कियों के शीशे टूट जाते थे. तब सारांश के पिता कहते थे कि वह नया शीशा लगवा देंगे, लेकिन एक दिन ये ही पड़ोसी इस बच्चे पर गर्व करेंगे.’ सारांश के खेल की एक खूबी उनकी गेंदबाजी और बल्लेबाजी का खास संयोजन भी है. वह दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं और बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं.

जब पिता ने कहा – तू लेफ्टी बल्लेबाज बनेगा
सारांश के बड़े भाई सौरभ जैन ने बताया कि बचपन में सारांश दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे, लेकिन पिता ने उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें बाएं हाथ से बल्लेबाजी के लिए प्रेरित किया. सौरभ ने कहा, ‘मैं दाएं हाथ से बल्लेबाजी करता हूं, इसलिए सारांश भी मुझे देखकर दाएं हाथ से खेलता था, लेकिन एक दिन पापा ने देखा कि वह बाएं हाथ से बेहतर खेल रहा है और उसके शॉट अच्छे निकल रहे हैं. तब उन्होंने कहा-बेटा, तू लेफ्टी बल्लेबाज बनेगा.’

परिवार को डेब्यू का इंतजार
पूर्व रणजी खिलाड़ी सुबोध जैन ने कहा कि इन दिनों अक्सर देखा जा रहा है कि आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद खिलाड़ी भारतीय टीम में चुने जाते हैं, लेकिन उनके बेटे ने मुख्य रूप से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना लोहा मनवाकर टीम इंडिया में जगह बनाई है. उन्होंने कहा, ‘सारांश मैदान पर एक योद्धा की तरह खेलता है. वह जो ठान लेता है, उसे पूरा करके ही दम लेता है.’ सारांश का परिवार अब उस पल का इंतजार कर रहा है, जब वह भारतीय टीम की सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेंगे.

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Shivam Upadhyay

परिचय
शिवम उपाध्याय एक खेल पत्रकार हैं, जो नवंबर 2025 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. क्रिकेट उनकी विशेषज्…

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