इस बार की कहानी थोड़ी अलग और ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. भारतीय टीम के 15 सदस्यीय स्क्वाड में से 12 खिलाड़ी ऐसे हैं जो पहली बार श्रीलंका में टेस्ट मैच खेलने उतरेंगे. इसमें कप्तान शुभमन गिल, रफ्तार के सौदागर जसप्रीत बुमराह, आक्रामक विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत और तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज जैसे बड़े नाम शामिल हैं. इन दिग्गज खिलाड़ियों ने भले ही दुनिया के बाकी कोनों में तिरंगा लहराया हो, लेकिन श्रीलंका के टर्निंग ट्रैक्स पर लाल गेंद से इनका अनुभव पहली बार आंका जाएगा.
1985 का पहला दौरा और शुरुआती असफलताएं
भारत ने पहली बार 1985 में कपिल देव की कप्तानी में श्रीलंका का दौरा किया था. उस दौरे का सफर आसान नहीं रहा. 30 अगस्त 1985 को कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला गया पहला टेस्ट मैच ड्रॉ रहा था. इसके बाद 6 सितंबर 1985 को पीएसएस मैदान पर श्रीलंका ने भारत को 149 रनों से हराकर करारी शिकस्त दी थी. सीरीज का आखिरी मैच कैंडी में 14 सितंबर को ड्रॉ पर समाप्त हुआ था और भारत यह सीरीज गंवा बैठा था.
1990 के दशक का संघर्ष और पहली जीत
1993 में भारत ने फिर कदम रखा. कैंडी का पहला मैच ड्रॉ रहने के बाद, 27 जुलाई 1993 को कोलंबो (एसएससी) में भारत को श्रीलंका की धरती पर अपनी पहली टेस्ट जीत मिली, जहां उन्होंने मेज़बान को 235 रनों से रौंदा. हालांकि, इसके बाद कोलंबो (पीएसएस) में 4 अगस्त से खेला गया तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा. इसके बाद 1997 में आरपीएस और एसएससी में खेले गए दोनों मुकाबले ड्रॉ पर छूटे.
1999 एशियाई चैंपियनशिप और 2001 का मिला-जुला दौरा
1999 में एशियाई टेस्ट चैंपियनशिप के तहत 24 फरवरी को एसएससी में खेला गया मुकाबला भी ड्रॉ रहा. फिर 2001 में सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत को गॉल में 14 अगस्त को 10 विकेट से करारी हार मिली. हालांकि 22 अगस्त को कैंडी में भारत ने 7 विकेट से वापसी करते हुए जीत दर्ज की, लेकिन 29 अगस्त को एसएससी में श्रीलंका ने भारत को पारी और 77 रनों से हरा दिया.
2008 का मिस्ट्री स्पिन से सामना और 2010 का रोमांच
2008 का दौरा भारतीय फैंस के लिए कड़वी यादें लेकर आया था, जब अजंता मेंडिस की मिस्ट्री स्पिन के सामने भारत ने 23 जुलाई को एसएससी में पारी और 239 रनों से मैच गंवा दिया था. 31 जुलाई को गॉल में भारत ने 170 रनों से मुकाबला जीतकर वापसी की, लेकिन 8 अगस्त को पीएसएस में 8 विकेट की हार से सीरीज हाथ से निकल गई. 2010 में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण रही. 18 जुलाई को गॉल में भारत 10 विकेट से हारा, 26 जुलाई को एसएससी मैच ड्रॉ रहा और फिर 3 अगस्त को पीएसएस में भारत ने 5 विकेट से रोमांचक जीत दर्ज कर सीरीज 1-1 से बराबर की.
2015 का टर्निंग प्वाइंट
2015 का श्रीलंका दौरा भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे अहम पड़ावों में से एक माना जाता है. 12 अगस्त 2015 को गॉल टेस्ट में विराट कोहली की कप्तानी में भारत को 63 रनों की बेहद दर्दनाक हार झेलनी पड़ी थी. श्रीलंका की धरती पर टेस्ट मैचों में भारत की यह आखिरी हार थी. उस हार के बाद भारतीय टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उसी दौरे पर 20 अगस्त को पीएसएस में भारत ने श्रीलंका को 278 रनों से हराया और 28 अगस्त को एसएससी में 117 रनों से मात देकर 2-1 से ऐतिहासिक सीरीज जीती.
2017 का एकतरफा दबदबा
2017 में भारत ने श्रीलंकाई टीम का पूरी तरह सफाया कर दिया. 26 जुलाई 2017 को गॉल में 304 रनों की विशाल जीत, 3 अगस्त को एसएससी में पारी और 53 रनों की जीत, और 12 अगस्त को पल्लेकेले में पारी और 171 रनों की धमाकेदार जीत के साथ भारत ने सीरीज 3-0 से अपने नाम की.
पुराना रिपोर्ट कार्ड और नई चुनौतियां
अगर सीरीज के नतीजों पर नजर डालें तो 1985, 1993, 2001 और 2008 की चारों सीरीज में भारत को नाकामी मिली थी, जबकि 2010 की सीरीज 1-1 से बराबर रही थी. लेकिन 2015 (2-1) और 2017 (3-0) की पिछली दो सीरीज जीतकर भारत ने अपना दबदबा साबित किया है.
2026 दौरे की बड़ी जिम्मेदारी
अब 2026 में, जब भारतीय टीम 9 साल बाद श्रीलंका में टेस्ट सीरीज खेलने उतर रही है, तो उनके सामने अपने पिछले 5 टेस्ट मैचों की जीत की लय को बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी. 12 नए चेहरे और युवा कप्तान शुभमन गिल के कंधों पर इतिहास के इस मजबूत रिकॉर्ड को आगे बढ़ाने का दारोमदार है.
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.